दिल्ली में विधवा महिला से सालों तक रेप करने वाले स्विमिंग कोच को 10 साल की जेल, लाखों का जुर्माना
पीड़ित महिला 22 साल पहले बेटी के स्विमिंग कोच के संपर्क में आई थी। फिर उसने भरोसा जीतकर घर में आना-जाना शुरू कर दिया। जून 2005 में आरोपी एक दिन वह कोल्ड ड्रिंक और पेस्ट्री लेकर महिला के घर पहुंचा और उसमें नशीला पदार्थ मिलाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया।

दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत ने नशीला पदार्थ देकर विधवा महिला के साथ दुष्कर्म करने के दोषी स्विमिंग कोच परवीन शौकीन को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विप्लव डबास की अदालत ने कहा कि आरोपी ने पहले पीड़िता का विश्वास जीता और उसी का दुरुपयोग कर योजनाबद्ध तरीके से उसका शारीरिक व मानसिक शोषण किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे अपराध महिलाओं की सुरक्षा व विश्वास को गहरी चोट पहुंचाते हैं।
वीडियो बनाकर कई सालों तक किया शोषण
मामला केएन काटजू मार्ग थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, जून 2004 में बेटी के स्वीमिंग सीखने के दौरान पीड़िता का संपर्क उसके स्विमिंग कोच परवीन शौकीन से हुआ था। उसने भरोसा जीतकर घर में आना-जाना शुरू कर दिया। जून 2005 में एक दिन वह कोल्ड ड्रिंक और पेस्ट्री लेकर महिला के घर पहुंचा और उसमें नशीला पदार्थ मिलाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया और मोबाइल से अश्लील वीडियो बना लिया। वीडियो के जरिये वह कई सालों तक ब्लैकमेल कर शारीरिक शोषण करता रहा। उसने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी छेड़छाड़ की। आरोपी ने महिला को झांसा देकर उसका मकान अपनी पत्नी के नाम करवा लिया। आरोपी द्वारा मकान वापस करने से इनकार करने पर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2014 में इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया।
नरमी की अपील खारिज
सजा पर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक विनीत दहिया ने पीड़ित पक्ष की ओर से दलील रखते हुए कहा कि आरोपी ने विश्वास का घोर दुरुपयोग किया और एक विधवा को निशाना बनाया, इसलिए वह किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है। वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह लंबे समय तक चले मुकदमे का सामना कर चुका है और उसके सामाजिक जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप होनी चाहिए।
इन धाराओं में सुनाई सजा और मुआवजे का आदेश
अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 328 के तहत 8 साल का कठोर कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माना, धारा 376 के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 354 के तहत 2 वर्ष का कारावास और 2 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पीड़िताओं को समान रूप से मुआवजे के तौर पर दी जाए। इसके अलावा अदालत ने मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न को देखते हुए 5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देने का आदेश दिया। इसमें से 3 लाख रुपये पीड़ित विधवा और 2 लाख रुपये बेटी को देने का निर्देश दिया।




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