दिल्ली में मर्डर केस में मामूली गिरावट, खतरा अभी भी बरकरार; जानें राजधानी का क्राइम रेट
NCRB Data: राजधानी दिल्ली में साल 2024 के दौरान हत्या के मामलों में हल्की कमी दर्ज की गई है, लेकिन क्राइम रेट अब भी राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है।

NCRB Data: राजधानी दिल्ली में साल 2024 के दौरान हत्या के मामलों में हल्की कमी दर्ज की गई है, लेकिन क्राइम रेट अब भी राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ के मुताबिक, वर्ष 2024 में दिल्ली में कुल 504 हत्या के मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 506 और 2022 में 509 थी। इस तरह आंकड़ों में मामूली गिरावट तो दिखती है, लेकिन इस मामूली गिरावट को कतई संतोषजनक नहीं माना जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में हत्या की दर 2024 में प्रति एक लाख आबादी पर 2.3 रही, जो राष्ट्रीय औसत 1.9 से अधिक है। NCRB के अनुमान के मुताबिक, 2024 में दिल्ली की मध्य-वर्ष आबादी करीब 2.18 करोड़ रही। यह अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि राजधानी में हत्या के मामलों की संख्या भले ही थोड़ी घटी हो, लेकिन प्रति व्यक्ति अपराध का जोखिम अब भी ज्यादा बना हुआ है।
हालांकि, जांच और कानूनी प्रक्रिया के मोर्चे पर दिल्ली पुलिस का प्रदर्शन बेहतर नजर आता है। हत्या के मामलों में 2024 के दौरान चार्जशीट दाखिल करने की दर 90.8 प्रतिशत रही, जो दर्शाता है कि ज्यादातर मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया। यह राष्ट्रीय औसत 84.7 प्रतिशत से भी अधिक है।
संघ शासित प्रदेशों की तुलना में दिल्ली में हत्या के मामलों की संख्या सबसे अधिक रही। जहां चंडीगढ़ में 22 और जम्मू-कश्मीर में 90 हत्या के मामले दर्ज किए गए, वहीं दिल्ली 504 मामलों के साथ शीर्ष पर रही। यह आंकड़ा राजधानी में कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों को भी मजबूती देता है।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो 2024 में देशभर में कुल 27,049 हत्या के मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 27,721 और 2022 के 28,522 मामलों की तुलना में कमी को दर्शाते हैं। इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ संख्या में गिरावट पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपराध दर और उसकी प्रकृति पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। कुल मिलाकर, दिल्ली में हत्या के मामलों में आई हल्की गिरावट राहत जरूर देती है, लेकिन राष्ट्रीय औसत से अधिक अपराध दर यह संकेत देती है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।




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