दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने एक नंबर के लिए 5 साल कानूनी लड़ाई लड़ी, आखिरकार जीत हुई; क्या मामला
दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने एक नंबर के लिए पांच साल कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिकार पहले केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) और अब दिल्ली हाई कोर्ट में जीत हासिल की है। हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि इस सिपाही को पदोन्नत कर हेड कांस्टेबल बनाए और सभी लाभ दिए जाएं।

दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने एक नंबर के लिए पांच साल कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिकार पहले केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) और अब दिल्ली हाई कोर्ट में जीत हासिल की है।
हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि इस सिपाही को पदोन्नत कर हेड कांस्टेबल बनाए और पद के हिसाब से सभी लाभ दिए जाएं। न्यायमूर्ति अमित महाजन व न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने अपने फैसले में कैट के निर्णय को बरकरार रखा है। पीठ ने कहा कि इस कांस्टेबल द्वारा अंतर विभागीय परीक्षा में दिए गए उत्तर में दो ऐसे सवालों के जवाब दिए गए थे, जोकि न्यायिक सुनवाई के दौरान व्यावहारिक तौर पर उचित थे।
अतिरिक्त नंबर पाने का हकदार
पीठ ने कहा कि अदालत जब किसी मामले पर सुनवाई करती है तो बेशक तय कानून के हिसाब से करती है, मगर कुछ जगहों पर नैतिक और सामाजिक मूल्यों का ख्याल भी रखा जाता है। इस कांस्टेबल ने उत्तर पुस्तिका में इन दो सवालों के जवाब व्यावहारिक ज्ञान के मुताबिक सही दिए। ऐसे में वह दो अतिरिक्त नंबर पाने का हकदार है। दो नंबर बढ़ने से वह पदोन्नति पाने का हकदार हो गया है, जबकि पिछले पांच साल से उसकी पदोन्नति महज एक नंबर कम आने की वजह से रुकी थी।
पुलिस ने जताई थी आपत्ति
दिल्ली पुलिस आयुक्त की तरफ से उच्च न्यायालय में दायर पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण(कैट) पुलिस महकमे के सवाल व जवाबों में हस्तक्षेप कर सकता है। पदोन्नति के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले अधिकारी की कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा नहीं कर सकता। कैट को यह अधिकार नहीं है कि वह कानून से संबंधित प्रश्नपत्र में जवाब अपने मुताबिक तय कर नंबर बढ़ा दे। पीठ ने पुलिस की इस दलील को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि कैट अथवा कोई भी अदालत अपने आप में कानून के विशेषज्ञ हैं। उन्हें कानून की सही परिभाषा पेश करने का हक है।
क्या था मामला
एक युवक ने वर्ष 2007 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति पाई। यह कांस्टेबल वर्ष 2021 में अंतर विभागीय पदोन्नति परीक्षा में बैठा। कट-ऑफ सूची जारी हुई। इस परीक्षा में कांस्टेबल को 111 नंबर प्राप्त हुए। जबकि मेरिट सूची 112 नंबर तक आई। इस तरह कांस्टेबल एक नम्बर से पदोन्नति पाने से चूक गया। कांस्टेबल ने कैट में अपना पक्ष रखा और उत्तर-पुस्तिका में कानूनी लड़ाई लड़ते हुए दो अंक बढ़वा लिया। अब वह पदोन्नति का हकदार बन गया।
दो प्रश्नों के उत्तर को कोर्ट ने सही माना
पुलिस कांस्टेबल को जिन दो सवालों पर दो नंबर मिले हैं उनमें पहला सवाल था कि बाल यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम(पॉक्सो) के तहत कितनी उम्र होनी चाहिए। कांस्टेबल ने जवाब में 16 साल उम्र बताई। पुलिस विभाग ने इस जवाब को गलत माना। उनका कहना था कि पॉक्सो के तहत अधिकतम उम्र 18 वर्ष है। वहीं, कैट ने कहा, पॉक्सो संशोधन अधिनियम की धारा 4(2) के तहत नाबालिग की उम्र 16 वर्ष सही जवाब हो सकता है।
दूसरा सवाल गवाह के बयान कौन दर्ज कराता है, इसके जवाब में कांस्टेबल ने लिखा था सरकारी वकील। पुलिस का कहना का बयान मजिस्ट्रेट दर्ज कराता है, जबकि कैट ने कहा कि सरकारी वकील भी गवाह के बयान दर्ज कराता है। इसलिए जवाब भी सही है।




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