Delhi High Court said if educational qualifications are different, salaries can also be different अगर शैक्षणिक योग्यता अलग तो वेतन भी अलग हो सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट, Ncr Hindi News - Hindustan
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अगर शैक्षणिक योग्यता अलग तो वेतन भी अलग हो सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत स्पष्ट किया है कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत केवल पद या काम की समानता पर आधारित नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि दो कैडरों के बीच शैक्षणिक योग्यता में अंतर है तो उनके वेतन में अंतर को जायज ठहराया जा सकता है।

Sun, 22 Feb 2026 06:07 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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अगर शैक्षणिक योग्यता अलग तो वेतन भी अलग हो सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत स्पष्ट किया है कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत केवल पद या काम की समानता पर आधारित नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि दो कैडरों के बीच शैक्षणिक योग्यता में अंतर है तो उनके वेतन में अंतर को जायज ठहराया जा सकता है।

जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल व जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जब दो लोग अलग-अलग स्तर की शिक्षा पाएंगे तो निश्चिततौर पर उनके ज्ञान में अंतर होगा। उच्च शिक्षित व्यक्ति अधिक जानकारियों से सम्पन्न होगा और कम शिक्षा पाने वाले का अपना दायरा होगा। ऐसे में अधिक ज्ञान वाले व्यक्ति को अधिक वेतन मिलना अनुचित नहीं है।

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बेंच ने यह टिप्पणी दिल्ली मेडिकल टेक्निकल एम्प्लॉइज एसोसिएशन की याचिका को खारिज करते हुए की। बेंच ने केन्द्र सरकार के तहत कार्यरत कर्मचारियों को अधिक वेतन मिलने का समर्थन किया। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि वेतन में समानता का दावा केवल इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि पदनाम या काम की प्रकृति समान है। बेंच ने बिहार राज्य बनाम बिहार माध्यमिक शिक्षक संघर्ष समिति मामले का हवाला देते हुए कहा कि वेतन समानता के लिए भर्ती प्रक्रिया, योग्यता व सेवा शर्तों में पूर्ण समानता होनी अनिवार्य है, जबकि इस मामले में केन्द्र व राज्य सरकार के कर्मियों की शिक्षा से लेकर भर्ती प्रक्रिया में कोई समानता नहीं है।

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बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि दिल्ली नगर निगम में लैब टेक्नीशियन के लिए न्यूनतम योग्यता केवल मैट्रिक (10वीं) है, जबकि केन्द्र सरकार के तहत इसी पद के लिए बीएससी की डिग्री अनिवार्य है। बेंच ने माना कि शैक्षणिक योग्यता वर्गीकरण का एक वैध और तर्कसंगत आधार है।

केन्द्र व राज्य सरकार के वेतन को दी गई थी चुनौती

इस मामले में दिल्ली मेडिकल टेक्निकल एम्प्लॉइज एसोसिएशन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि दिल्ली नगर निगम के अस्पतालों में कार्यरत लैब टेक्नीशियन को केन्द्र सरकार के संस्थानों (जैसे एम्स व एनआईसीडी) के लैब टेक्नीशियनों के समान वेतन मिलना चाहिए। याचिका में तर्क दिया गया था कि क्योंकि उनके पद का नाम और काम समान है इसलिए उन्हें भी पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन मिलना चाहिए।

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