वेतन का भुगतान कोई विवेकाधीन विषय नहीं, नियोक्ता का मूलभूत दायित्व है : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी और 163 साल पुरानी हरदयाल म्युनिसिपल हेरिटेज पब्लिक लाइब्रेरी को कर्मचारियों के वर्षों से लंबित वेतन के भुगतान के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को नियमित और तय समय पर मासिक वेतन देने के निर्देश का सख्ती से पालन किया जाए।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और 163 साल पुरानी हरदयाल म्युनिसिपल हेरिटेज पब्लिक लाइब्रेरी को कर्मचारियों के वर्षों से लंबित वेतन के भुगतान के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को नियमित और तय समय पर मासिक वेतन देने के निर्देश का सख्ती से पालन किया जाए।
जस्टिस संजीव नरूला की अध्यक्षता वाली बेंच ने 25 याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। ये याचिकाएं लाइब्रेरी में कार्यरत लाइब्रेरियन समेत 100 कर्मचारियों ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि पिछले कई वर्षों से उन्हें वेतन का भुगतान अनियमित रूप से या बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। इस कारण उन्हें बार-बार कोर्ट की शरण लेनी पड़ रही है। बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कर्मचारियों को लंबे समय तक नियमित वेतन से वंचित रखा गया, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
बेंच ने दोहराया कि वेतन का भुगतान कोई विवेकाधीन विषय नहीं है, बल्कि यह नियोक्ता का मूलभूत दायित्व है। बेंच ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा का पालन न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील कृतिका मट्टा व भूमिका कुंद्रा ने कर्मचारियों को हो रही कठिनाइयों को कोर्ट के समक्ष रखा।
आदेश की मुख्य बातें
● लाइब्रेरी प्रशासन अप्रैल 2025 से लंबित वेतन का ब्योरा महीने और कर्मचारी के हिसाब 10 दिनों में पेश करे
● ब्योरा मिलने के बाद एमसीडी को चार सप्ताह के भीतर वेतन-विशेष अनुदान जारी करने का निर्देश दिया गया है
● लाइब्रेरी अनुदान प्राप्त होने के सात कार्यदिवसों के भीतर याचिकाकर्ताओं को वेतन का भुगतान करे
● भविष्य में वेतन भुगतान की व्यवस्था निर्धारित की जाए, ताकि हर महीने 10 तारीख तक वेतन दिया जा सके




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