पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कुर्की की कार्रवाई से मुक्त नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि पैतृक संपत्ति प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कुर्की की कार्रवाई से मुक्त नहीं है। बेंच ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई में कुर्की के मामलों में पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियों के लिए कानून में कोई अपवाद नहीं है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कुर्की की कार्रवाई से मुक्त नहीं है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की कि मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई में कुर्की के मामलों में पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियों के लिए कानून में कोई अपवाद नहीं है।
हाईकोर्ट ने पीएमएलए के तहत अपीलीय न्यायाधिकरण के 2025 के आदेश के खिलाफ एक व्यक्ति द्वारा दायर अपील पर फैसला सुनाया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सैनिक विहार में उसकी संपत्ति की अस्थायी कुर्की की पुष्टि को बरकरार रखा गया था।
यहां जिस प्रॉपर्टी की बात हो रही है, वह 255, सैनिक विहार, पीतमपुरा, दिल्ली में है। अपील करने वाले ने दलील दी कि यह प्रॉपर्टी 1991 में उसके पिता ने अपनी इनकम से खरीदी थी और उन्होंने इसे खरीदने में कोई पैसा नहीं दिया था।
अपीलकर्ता ने कहा कि संपत्ति कभी भी उसके द्वारा नहीं खरीदी गई थी और उसके पिता ने 1991 में अपनी निजी आय से उनके संयुक्त नाम पर खरीदी थी और इसलिए इसे कुर्क नहीं किया जा सकता है।
यह अपील PMLA के सेक्शन 42 के तहत फाइल की गई थी, जिसमें अपीलेट ट्रिब्यूनल के 27 नवंबर, 2025 के ऑर्डर को चुनौती दी गई थी, जिसने 28 जुलाई, 2017 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर की पुष्टि को बरकरार रखा था।
हाईकोर्ट ने हालांकि कहा कि अपीलकर्ता का यह तर्क कि पैतृक संपत्ति को तब तक कुर्क नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे अवैध रूप से अर्जित धनराशि से न खरीदा गया हो, गलत था और पीएमएलए की योजना के विपरीत था।
हाईकोर्ट ने 16 फरवरी को पारित अपने आदेश में अपील खारिज करते हुए कहा, ''संपत्ति के पैतृक होने की दलील स्वतः ही पीएमएलए के तहत कुर्की की कार्रवाई से छूट प्रदान नहीं करती है। इस कानून में पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियों के लिए कोई अपवाद नहीं है और इसलिए, ये कुर्की से मुक्त नहीं हैं।''
ईडी ने कहा कि अपीलकर्ता द्वारा अपराध से अर्जित धन विदेशी मुद्रा के रूप में था, जिसे विदेश भेज दिया गया था और इसलिए यह उपलब्ध नहीं था। हाईकोर्ट को बताया गया कि इसलिए, अपीलकर्ता की मौजूदा संपत्ति को पीएमएलए के तहत बराबर मूल्य का मानते हुए कुर्क कर लिया गया।




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