दिल्ली में विरासत स्थलों के पास अवैध निर्माण की होगी पड़ताल, हाइकोर्ट ने दिए आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी की ऐतिहासिक विरासत यानी हेरिटेज संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एमसीडी को निर्देश दिया है कि वह इन धरोहरों के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों का व्यापक सर्वे करे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित विरासत संपत्तियों के आसपास स्थित इमारतों में अवैध निर्माण की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने एमसीडी को व्यापक सर्वे कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि यह सर्वे यह पता लगाने के लिए आवश्यक है कि क्या विरासत (हेरिटेज) स्थलों के निकट की जा रही या पहले से की गई निर्माण गतिविधियां भवन उपविधियों व स्वीकृत नक्शों के अनुरूप हैं या नहीं।
शिकायतों पर सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने यह निर्देश उन याचिकाओं के समूह पर सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें हेरिटेज स्थलों के आसपास भवन उपविधियों के उल्लंघन को लेकर गंभीर शिकायतें उठाई गईं थीं।
अवैध निर्माण से बदल रहा स्वरूप
पीठ ने याचिकाकर्ताओं की इस दलील पर ध्यान दिया कि हेरिटेज संपत्तियों के आसपास हो रहे अनधिकृत निर्माण न केवल उनके स्वरूप को बदल रहे हैं, बल्कि कई मामलों में ऐतिहासिक इमारतों की मूल पहचान व दृश्य सौंदर्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मंजूरी देते समय नहीं किया गया नियमों का पालन
पीठ के समक्ष यह भी कहा गया कि कई बार एमसीडी द्वारा भवन योजनाओं को मंजूरी देते समय न तो संबंधित भवन उपविधियों का पालन किया गया और न ही हेरिटेज संरक्षण समिति की सलाह पर विचार किया गया।
नक्शों से हटकर निर्माण का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह आरोप लगाया गया कि दिल्ली में हेरिटेज संपत्तियों के आसपास स्थित भवनों के कब्जाधारक स्वीकृत नक्शों से हटकर निर्माण कर रहे हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे तौर पर हेरिटेज इमारतों पर पड़ता है। अदालत ने निर्देश दिया कि सर्वे के लिए गठित टीम में हेरिटेज संरक्षण समिति का अधिकारी भी शामिल किया जाए, जिसे समिति के अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाएगा।
मांगी सर्वे रिपोर्ट
पीठ ने आदेश दिया कि प्रत्येक हेरिटेज संपत्ति के संबंध में अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट तैयार कर उसे अदालत में पेश की जाए। उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के वकीलों को भी दी जाए, ताकि वे आवश्यक होने पर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल कर सकें। पीठ ने स्पष्ट किया कि इस आदेश के तहत किया जाने वाला सर्वे तीन माह की अवधि के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए सर्वे रिपोर्ट दाखिल किए जाने की समय-सीमा भी निर्धारित की है।




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