अस्पताल ने नहीं किया इलाज, दिल्ली हाई कोर्ट बना सहारा, अब छात्र को वापस मिलेगा पैसा
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने आदेश देते हुए एक छात्र के मेडिकल खर्च की भरपाई करने को कहा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला बताते हुए पैसे देने का आदेश दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाई कोर्ट ने आदेश देते हुए एक छात्र के मेडिकल खर्च की भरपाई करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि समय पर इलाज न देना राज्य की जिम्मेदारी का उल्लंघन है और यह सीधे तौर पर जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला है। ऐसे में इलाज के लिए आए खर्च को सरकार को देना पड़ेगा। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर 12,000 रुपये वापस करे। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अलग से मुआवजे के लिए सिविल मुकदमा दायर करने की छूट भी दी है।
इलाज से कर दिया था इनकार
दिल्ली में एक छात्रा का हाथ स्कूल में खेलते समय टूट गया था। उसे इलाज के लिए पहले डॉक्टर हेडगेवार आरोग्यम संस्थान ले जाया गया। यहां जरूरी मेडिकल सामान नहीं होने के कारण इलाज नहीं हो सका। इसके बाद उसे चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद न होने के कारण इलाज से इनकार कर दिया गया। आखिरकार मजबूरी में परिजनों को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा, जहां करीब 14,000 रुपये खर्च हुए। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि दोनों सरकारी अस्पतालों में इलाज न मिलने की बात खुद सरकारी पक्ष ने स्वीकार की है।
कोर्ट ने किस मामले का दिया हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति वर्सेस पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसा न करना अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने मेडिकल खर्च की भरपाई को उचित ठहराया, लेकिन अतिरिक्त मुआवजे के लिए अलग सिविल मुकदमे की जरूरत बताई।




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