सैनिटरी पैड को GST छूट तो एडल्ट डायपर को क्यों नहीं, 6 महीने में लें फैसला; केंद्र से HC
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को 6 महीने के भीतर एडल्ट डायपर पर जीएसटी छूट की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कोई विलासिता की वस्तु नहीं वरन एक जरूरत है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एडल्ट डायपर पर लगने वाले 5 फीसदी जीएसटी को हटाने की मांग वाली याचिका पर 6 महीने के भीतर फैसला ले। अदालत में दाखिल याचिका में दलील दी गई है कि एडल्ट डायपर कोई विलासिता की वस्तु नहीं है वरन यह बीमार और बुजुर्गों की एक अनिवार्य जरूरत है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जब सैनिटरी पैड को टैक्स से छूट दी गई है तो उसी श्रेणी के एडल्ट डायपर पर टैक्स लगाना भेदभावपूर्ण है।
छह महीने में करें विचार
न्यायमूर्ति नितिन डब्ल्यू सांब्रे और न्यायमूर्ति अजय दिगपाल की पीठ ने केंद्र सरकार को वयस्कों के डायपर को जीएसटी से छूट देने संबंधी याचिका पर छह महीने के अंदर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया। अदालत ने वयस्क या क्लिनिकल डायपर पर लगाए गए 5 फीसदी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किया।
जब सैनिटरी पैड को टैक्स से छूट तो डायपर पर GST क्यों?
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वयस्कों के डायपर कोई विलासिता की वस्तु नहीं हैं। इनका इस्तेमाल अत्यधिक संवेदनशील आबादी करती है। जब सैनिटरी पैड को टैक्स से छूट दी गई है तो वयस्कों के डायपर पर जीएसटी लगाने का कोई कारण नहीं है। सैनिटरी पैड और वयस्क डायपर के उपयोग में कोई खास अंतर नहीं है।
जरूरतमंद इसके बिना नहीं रह सकते
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि यदि आपको इसकी जरूरत है तो आप इसके बिना नहीं रह सकते क्योंकि यह एक जरूरी स्वच्छता उत्पाद है। इसके बिना जीवन सम्मानजनक नहीं रह जाता है। याचिका दायर करने वाले दिव्यांग व्यक्तियों ने तीन सितंबर, 2025 को अधिकारियों को एक प्रतिवेदन भेजा था, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
छह महीने की डेड लाइन तय
याचिकाकर्ताओं की दलील पर गौर करते हुए पीठ ने अपना आदेश दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अधिकारी 3 सितंबर 2025 के याचिकाकर्ताओं के प्रतिवेदन और उसमें उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार करके फैसला लें। यह फैसला उचित समय के अंदर लिया जाना चाहिए। अदालत इसके लिए छह महीने की समय सीमा निर्धारित कर रही है।
जीएसटी लगाना एक नीतिगत फैसला
वहीं अधिकारियों के वकील ने कहा कि जीएसटी लगाना एक नीतिगत फैसला है। इस मुद्दे पर GST काउंसिल ही विचार कर सकती है। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि बड़ों के डायपर पर जीएसटी का बोझ समाज के सबसे कमजोर लोगों (दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों) पर अधिक पड़ता है। कई मामलों में तो इनकी जरूरत जीवन भर और अधिक मात्रा में पड़ती है।




साइन इन