केवल मृत्युपूर्व बयान ही सजा का आधार नहीं, पत्नी की हत्या का आरोपी पति बरी
दिल्ली की एक अदालत ने पत्नी को आग लगाकर मारने के आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया है कि केवल मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती है।

दिल्ली की एक अदालत ने 2016 में अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी को 10 साल बाद बरी कर दिया है। शख्स पर पत्नी को पेट्रोल डालकर जलाने का आरोप था। पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है खासकर तब जब बयान में विरोधाभास हो। अदालत ने सबूतों की कमी और बयानों में अंतर के कारण आरोपी पति को बरी कर दिया।
आरोप साबित करने में नाकाम
एडिशनल सेशन जज हिमांशु रमन सिंह ने यह भी कहा कि प्रॉसिक्यूशन उत्तम नगर के रहने वाले आरोपी अरविंद चौधरी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा। बीते कोर्ट ने 7 फरवरी के एक ऑर्डर में कहा कि अदालत का मानना है कि प्रॉसिक्यूशन आरोपी अरविंद चौधरी के खिलाफ़ बिना किसी शक के अपना केस साबित नहीं कर पाया है। इसलिए आरोपी को आईपीसी सेक्शन 302 (मर्डर) के तहत सजा वाले जुर्म से बरी किया जाता है।
पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप
अरविंद चौधरी पर 19 सितंबर 2016 को अपने घर में पत्नी पूजा पर पेट्रोल डालकर आग लगाने का आरोप था। जलने के कारण 27 सितंबर को उसकी मौत हो गई। उत्तम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज केस पर पति के खिलाफ हत्या का मामला चलाया गया। अभियोजन का मामला मुख्य रूप से घटना के दिन कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से दर्ज मृत्युपूर्व बयान पर आधारित था जिसमें मृतका ने आरोप लगाया था कि घरेलू झगड़े के बाद पति ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी।
पिता और भाई ने पति के पक्ष में दी गवाई
इस बयान को पत्नी की मौत से पहले का बयान माना गया। हालांकि मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृतका के पिता और भाई ने गवाही दी थी कि जब वे 21 सितंबर को अस्पताल में उससे मिले तो उसने उनको बताया कि खाना बनाते समय गलती से आग लग गई थी। उन्होंने उसकी मौत से एक दिन पहले उत्तम नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को भेजे गए एक लेटर का भी जिक्र किया जिसमें शिकायत वापस लेने की मांग की गई थी।
घटना के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं
इस लेटर में कहा गया था कि घटना के लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है। जज ने कहा कि मृतका के कई अलग-अलग बयान हैं। यह तथ्य कि मृतका के भाई और पिता ने खुद कोर्ट में गवाही दी है कि पीड़िता ने उन्हें बताया था कि खाना बनाते समय उसे आग लग गई थी।
मरने से पहले के बयान पर नहीं दे सकते सजा
अदालत ने कहा कि ये बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। बयानों में अंतर गंभीर थे। कोर्ट ने प्रॉसिक्यूशन के केस में कुछ कमियां बताईं। इसमें एक बाल्टी का नहीं मिलना भी शामिल है। इसके बारे में कहा गया था कि बाल्टी का इस्तेमाल कथित तौर पर स्कूटर से पेट्रोल निकालने के लिए किया गया था। कोर्ट ने चौधरी को आरोप से बरी करते हुए कहा कि आरोपी को केवल मरने से पहले दिए गए बयान के आधार पर ही सजा नहीं दी जा सकती है।




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