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पीएम की सुरक्षा में सेंध से लेकर करप्शन तक… दिल्ली जिमखाना क्लब पर कितने आरोप?

दिल्ली जिमखाना क्लब पर वित्तीय अनियमितता, अवैध नियुक्तियां और पीएम की सुरक्षा में सेंध जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में कई गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है।

Mon, 25 May 2026 06:40 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान
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पीएम की सुरक्षा में सेंध से लेकर करप्शन तक… दिल्ली जिमखाना क्लब पर कितने आरोप?

दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस बीच जिमखाना क्लब में कथित तौर पर गंभीर गड़बड़ियां उजागर होने की बातें भी सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच में दिल्ली जिमखाना क्लब में 50 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता, अवैध नियुक्तियों और पीएम की सुरक्षा में सेंध लगाने जैसी गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं।

CNN-News18 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने साल 2022 में दिल्ली जिमखाना क्लब की जांच के बाद 50 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ ही वित्तीय अनियमितताओं से लेकर अवैध नियुक्तियों और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध तक कई गैर कानूनी कार्यों की ओर इशारा किया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब में कथित धोखाधड़ी और गैर-कानूनी कार्यों के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजी गई सरकारी फाइल की नोटिंग्स CNN-News18 को मिली हैं।

बिना कोरम के लिए फैसले

दिल्ली जिमखाना क्लब पर नियमों के उल्लंघन और बिना कोरम के फैसले लेने के आरोप हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन्हीं वित्तीय अनियमितताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार ने क्लब को 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है। अब चूंकि मामला दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि प्रकरण में कौन-कौन से आरोप सामने आते हैं और इन पर अदालत क्या रुख अख्तियार करती है।

वित्तीय अनियमितता के आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की पूरक जांच रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। यही नहीं कंपनी अधिनियम- 1956 और कंपनी अधिनियम- 2013 के साथ ही अन्य कायदा कानूनों का उल्लंघन करते हुए क्लब को चलाने का आरोप है। रिपोर्ट में 50 करोड़ रुपये तक की पब्लिक डिपॉजिट में भ्रष्टाचार का आरोप है। उक्त आरोपों पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) में सुनवाई भी हुई थी जिसके बाद तत्कालीन सदस्यों को सस्पेंड कर दिया गया था।

PM की सुरक्षा में सेंध

तत्कालीन अतिरिक्त DCP हेमंत तिवारी की ओर से दस्तखत किए गए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के उप निदेशक को संबोधित एक पत्र में दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के खिलाफ एक शिकायत का उल्लेख किया गया था। इसमें कहा गया था कि जिमखाना के तत्कालीन सचिव ए. वर्मा ने कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर साजिश रची और प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियां कीं। इन गतिविधियों के कारण प्रधानमंत्री की सुरक्षा खतरे में पड़ी।

कानून की उड़ाई धज्जियां

जांच में पाया गया कि क्लब के कर्मचारियों ने ए. वर्मा को ड्रोन गतिविधि नहीं करने के लिए कहा लेकिन उन्होंनेसलाह को नजरअंदाज किया। इतना ही नहीं तत्कालीन सचिव ए. वर्मा ने निर्देशों और कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए 13 अगस्त 2022 को एक अनाधिकृत 'तिरंगा यात्रा' निकाली। इसका आयोजन तब किया गया जब वीवीआईपी मूवमेंड की संभावना थी। हालांकि तिरंगा यात्रा के आयोजक के साथ ही प्रतिभागियों पर IPC की धारा 186/188/34 के तहत प्राथमिकी (FIR नं. 124/22) भी दर्ज की गई।

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अवैध नियुक्तियां और गलत खर्च

जांच में पाया गया कि क्लब के सदस्यों की नियुक्तियां भी गैर-कानूनी तरीके से की गई थीं। हर महीने जरूरी बोर्ड की बैठकें भी नहीं हुईं। मंत्रालय की मानें तो 13 अगस्त 2022 को ड्रोन उड़ाने के मामले में नई दिल्ली जिले के DCP की ओर से FIR दर्ज की गई। इस पर आगे कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की गई क्योंकि पूरे प्रकरण पर दिल्ली पुलिस जांच कर रही है। आरोप यह भी है कि 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि गलत तरीके से खर्च की गई।

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राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण भी पहुंचा था मामला

इन शिकायतों के बीच कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने दिल्ली जिमखाना क्लब का निरीक्षण किया था। इनमें वित्तीय अनियमितताएं, रिकॉर्ड का गलत मैनेजमेंट, कंपनी कानून का उल्लंघन के साथ ही लगभग 50 करोड़ रुपये का कथित पब्लिक डिपॉजिट कलेक्शन पाया। इसके बाद मंत्रालय कंपनी अधिनियम की धारा 241 और 242 के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) पहुंचा और क्लब की जनरल कमेटी सस्पेंड करने की मांग उठाई। फिर NCLT की ओर से उक्त कमेटी सस्पेंड कर दी गई। इसके बाद क्लब के पास जरूरी कानूनी कोरम नहीं बन पाया।

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