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दिल्ली में पानी पर बनेगी बिजली! फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए 5 बड़ी बातें

खास बात यह है कि यह वही योजना है, जिसे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने प्रस्तावित किया था, लेकिन वह जमीन पर नहीं उतर सकी थी। अब भाजपा सरकार इसे लागू करने जा रही है। जानिए फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से जुड़ी 5 अहम बातें।

Wed, 15 April 2026 07:14 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में पानी पर बनेगी बिजली! फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, जानिए 5 बड़ी बातें

दिल्ली में बिजली उत्पादन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। छतों पर सोलर पैनल लगाने की पहल के बाद अब सरकार ने झीलों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर ली है। खास बात यह है कि यह वही योजना है, जिसे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने प्रस्तावित किया था, लेकिन वह जमीन पर नहीं उतर सकी थी। अब भाजपा सरकार इसे लागू करने जा रही है। जानिए फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से जुड़ी 5 अहम बातें।

1- छत के बाद पानी पर लगाए जाएंगे सोलर पैनल

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत पायलट आधार पर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के बवाना झील से की जाएगी। यहां पानी की सतह पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिनसे बिजली पैदा की जाएगी। सरकार ने इस योजना को मंजूरी दे दी है और जल्द ही टेंडर जारी किए जाएंगे।

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2- दिल्ली में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह दिल्ली में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट होगा। फिलहाल तेलंगाना और विशाखापत्तनम जैसे इलाकों में फ्लोटिंग सोलर पैनल पहले से काम कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो इसे यमुना नदी के वजीराबाद जैसे अन्य जल स्रोतों पर भी लागू किया जा सकता है।

3- पायलट प्रोजेक्ट के लिए बवाना झील को क्यों चुना गया

बवाना झील को पायलट प्रोजेक्ट के लिए इसलिए चुना गया है, क्योंकि यहां पहले से बड़ा पावर प्लांट मौजूद है और यह दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। इससे अनुमति और अन्य प्रक्रियाएं आसान हो जाएंगी। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 1 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता होगी, जिसे बवाना के बड़े पावर प्लांट की जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल किया जाएगा।

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4- प्रोजेक्ट की लागत 5-6 करोड़

अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के तहत झील में पहले फ्लोटर लगाए जाएंगे, जिन पर सोलर पैनल स्थापित होंगे। इसके बाद इन्हें ट्रांसफॉर्मर से जोड़ा जाएगा, जिससे पैदा होने वाली बिजली ग्रिड में सप्लाई की जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 5 से 6 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

5- 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य

जानकारों का मानना है कि फ्लोटिंग सोलर पैनल पारंपरिक रूफटॉप सोलर की तुलना में अधिक प्रभावी और किफायती हो सकते हैं। साथ ही, इससे जमीन की बचत भी होती है।दिल्ली सरकार ने नई सोलर पॉलिसी के तहत मार्च 2027 तक 4500 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट उस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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