Delhi Court Acquits Four Accused in Riot Case, says Trusting could be dangerous पुलिस गवाहों पर भरोसा करना होगा खतरनाक; दिल्ली की कोर्ट ने किस मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा कहा, Ncr Hindi News - Hindustan
More

पुलिस गवाहों पर भरोसा करना होगा खतरनाक; दिल्ली की कोर्ट ने किस मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा कहा

इस केस के संबंध में करावल नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हालांकि, अदालत ने सबूतों में गंभीर विसंगतियां पाईं। साथ ही शिकायतकर्ता वाजिद को सुनवाई के दौरान पेश नहीं किया जा सका।

Wed, 20 May 2026 05:59 PMSourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, निखिल पाठक, नई दिल्ली
share
पुलिस गवाहों पर भरोसा करना होगा खतरनाक; दिल्ली की कोर्ट ने किस मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा कहा

दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 में शहर में हुए दंगे से जुड़े एक मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में दो पुलिसकर्मियों की गवाही पर भरोसा करना 'खतरनाक' होगा, क्योंकि उनके बयान जांच रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से मेल नहीं खाते और उनमें विरोधाभास है। कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह करावल नगर में दंगों के दौरान एक ऑटो-रिक्शा को कथित रूप से जलाने और एक दुकान में तोड़फोड़ कर उसे आग लगाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में सुमित कुमार, अनुज, राहुल और सचिन आरोपी थे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:झुलसा देने वाली गर्मी; दिल्ली में 47°C जाएगा तापमान, 6 दिन लू का ऑरेंज अलर्ट

‘अभियोजन पक्ष मामला साबित करने में विफल रहा’

अदालत ने 19 मई को जारी अपने आदेश में कहा, 'मैं पाता हूं कि गवाह संख्या छह और सात (पुलिस अधिकारी) विश्वसनीय गवाह नहीं हैं और उनकी गवाही पर भरोसा करके अभियुक्तों के खिलाफ अभियोजन का निष्कर्ष निकालना खतरनाक होगा। इसलिए मैं पाता हूं कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है।'

ऑटो रिक्शा व दुकान में आग लगाने का था आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता वाजिद ने आरोप लगाया था कि 25 फरवरी, 2020 को दंगाइयों ने उसकी ऑटो-रिक्शा में आग लगा दी थी, जबकि एक अन्य शिकायतकर्ता शमशाद ने आरोप लगाया था कि दंगाइयों ने उसकी दुकान में तोड़फोड़ कर उसे जला दिया था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:DND से सीधे पहुंचेंगे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, नितिन गडकरी ने बताया पूरा प्लान

दो पुलिसकर्मियों ने दी थी गवाही

अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान की गई थी और मुख्य रूप से पुलिस कर्मियों हेड कांस्टेबल मिथिलेश और सहायक उप-निरीक्ष जुनैद की गवाही पर भरोसा किया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि उन्होंने भीड़ को एक ऑटो चालक पर हमला करते तथा वाहन और दुकान में आग लगाते हुए देखा था।

इस संबंध में करावल नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हालांकि, अदालत ने सबूतों में गंभीर विसंगतियां पाईं। साथ ही शिकायतकर्ता वाजिद को सुनवाई के दौरान पेश नहीं किया जा सका।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:साइबर क्राइम गैंग के 35 गिरफ्तार, पुलिस ने 40 करोड़ के फ्रॉड का किया पर्दाफाश

गवाहों ने जो जगह बताई वहां से दूर हुई थी घटना

अदालत के अनुसार, शमशाद ने कहा था कि उसकी गैर-मौजूदगी में उसकी दुकान में घटना हुई थी और वह दंगे या आगजनी में शामिल किसी भी व्यक्ति की पहचान नहीं कर सका। अदालत ने कहा कि जहां पुलिस गवाहों ने दावा किया कि उन्होंने करावल नगर चौक पर ऑटो को जलते हुए देखा था, वहीं जांच रिकॉर्ड से पता चलता है कि घटना का वास्तविक स्थान वहां से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पुश्ता रोड पर था।

अदालत ने कहा, 'इन दोनों गवाहों के बयान घटनास्थल के बारे में जांच अधिकारियों के बयानों से पूरी तरह अलग हैं।' इन सभी विरोधाभासों और कमजोर साक्ष्यों के चलते अदालत ने चारों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।