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दिल्ली में जनगणना से पहले होगी घरों की गिनती, खुद भी ऑनलाइन भर सकेंगे अपनी डिटेल; जानें तरीका

Delhi Census 2026 : दिल्ली में जनगणना की तैयारी तेज हो गई है। इस बार आप अपने मकान और जीवन स्तर की जानकारी खुद ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। आपकी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग जनकल्याणकारी नीतियां बनाने में होगा।

Fri, 10 April 2026 07:24 AMPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, अमित झा
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दिल्ली में जनगणना से पहले होगी घरों की गिनती, खुद भी ऑनलाइन भर सकेंगे अपनी डिटेल; जानें तरीका

Delhi Census 2026 : राजधानी दिल्ली में जनगणना करने से पहले लोगों के मकान एवं उनके जीवन स्तर को लेकर गणना शुरू होने जा रही है। आगामी 15 अप्रैल तक एनडीएमसी क्षेत्र जबकि 1 से 15 मई तक निगम क्षेत्र में रहने वाले लोग ऑनलाइन यह जानकारी खुद वेबसाइट पर डाल सकेंगे। कर्मचारी जब उनके घर आएंगे तो वह केवल अपने द्वारा दी गई जानकारी पर मिलने वाला नंबर बताएंगे, जिसका सत्यापन कर्मचारी द्वारा किया जाएगा। जनगणना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में दिल्लीवासियों के घर एवं उनकी आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।

ये प्रमुख सवाल पूछे जाएंगे

लोगों से पूछा जाएगा कि वह किस प्रकार के मकान में रहते हैं। उनके घर की दीवार, छत, फर्श आदि किस सामग्री से बनी है। वह अपने मकान में रहते हैं या किराये पर हैं। मकान में कितने कमरे हैं और उसमें रहने वालों की संख्या कितनी है। उनके घर में खाना बनाने के लिए अलग किचन है या नहीं। घर में शौचालय एवं नहाने की जगह अलग है या नहीं। घर में खाना पीएनजी-एलपीजी से बनता है या किसी अन्य ईंधन का इस्तेमाल होता है। पीने का पानी कहां से उपलब्ध होता है। उनके पास इंटरनेट, फोन, टीवी, डीटीएच, साइकिल, बाइक, कार आदि है या नहीं।

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गोपनीय रहेगी सूचना

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर कोई शख्स वेबसाइट पर जाकर खुद यह जानकारी भरता है तो उनके घर आने वाले गणना अधिकारी केवल दी गई जानकारी को सत्यापित करेंगे। अगर उसमें कोई गलत जानकारी होगी तो उसका सुधार करेंगे। ऑनलाइन फॉर्म भरने से लोगों का काफी समय बचेगा और यह कार्य जल्द पूरा करने में सरकार को मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि घर से संबंधित गणना के दौरान मिलने वाली जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसका इस्तेमाल जनकल्याण नीतियों के लिए होगा।

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ऐसे आत्मगणना कर सकते हैं

● सबसे पहले https:// se.census.gov.in वेबसाइट को खोलें

● यहां अपना नाम एवं मोबाइल नंबर डालकर ओटीपी की मदद से रजिस्ट्रेशन करें

● वहां मौजूद नक्शे पर अपने घर की जगह चिन्हित करें ताकि उसे दर्ज किया जा सके

● रजिस्ट्रेशन करने के बाद कई चरणों में सवाल पूछे जाएंगे

● प्रत्येक सवाल के कई विकल्प होंगे जिनमें से एक को चुना जा सकता है

● अंत में आपके द्वारा दी गई जानकारी दिखाई देगी, अगर वह सही है तो फॉर्म जमा करा सकते हैं

सभी राज्यों के लिए अलग अवधि तय

जनगणना में मकान से संबंधित जानकारी स्वयं देने के लिए सरकार ने अलग-अलग राज्यों के लिए 15-15 दिनों की अवधि तय की है। दिल्ली में एनडीएमसी क्षेत्र में जहां 1 से 15 अप्रैल तो वहीं निगम क्षेत्र में 1 से 15 मई की अवधि रखी गई है। इसी तरह उत्तराखंड में 10 से 24 अप्रैल, छतीसगढ़ में 16 से 30 अप्रैल, बिहार में 17 अप्रैल से 1 मई, झारखंड में 1 से 15 मई और उत्तर प्रदेश में 7 से 21 मई की अवधि तय की गई है।

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दिल्ली सरकार ने तय किए जनगणना के नियम

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने जनगणना 2027 से पहले, जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत कानूनी प्रावधानों और जनता की जिम्मेदारियों को बताते हुए एक डिटेल नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें जनता से पूरे सहयोग और डेटा इकट्ठा करने के दौरान सही प्रक्रिया का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट की ओर से यह नोटिफिकेशन 6 अप्रैल को जारी किया गया था।

एक अधिकारी ने बताया कि यह नोटिफिकेशन केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद जारी किया गया है। नोटिफिकेशन में शासन में जनगणना डेटा के महत्व पर जोर दिया गया है, जिसमें योजना बनाना, नीतियां बनाना और कल्याणकारी उपायों को लागू करना शामिल है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस काम के जरिए इकट्ठा किया गया डेटा प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा, जैसे कि चुनाव क्षेत्रों का सीमांकन और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों का आकलन।

महिलाओं के नाम बताने को मजबूर नहीं किया जा सकता

नोटिफिकेशन के अनुसार, जहां हर व्यक्ति को जनगणना अधिकारियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब अपनी सबसे अच्छी जानकारी या विश्वास के आधार पर सच-सच देने चाहिए, वहीं यह जनगणना एक्ट कुछ सुरक्षा उपाय भी देता है। उदाहरण के लिए, व्यक्तियों को परिवार की महिला सदस्यों के नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसी तरह, किसी महिला को अपने पति, दिवंगत पति या किसी रिश्तेदार का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक कि वह खुद ऐसा न चाहे।

जनगणना अधिकारियों की क्या शक्तियां

इस दस्तावेज में जनगणना अधिकारियों की शक्तियों का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्हें जनगणना के लिए किसी भी घर, परिसर या जगह में प्रवेश करने का अधिकार दिया गया है। निवासियों को ऐसा प्रवेश देना चाहिए और जरूरी सहयोग देना चाहिए। जनगणना प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर अधिकारी घरों और इमारतों पर निशान या नंबर भी लगा सकते हैं और रहने वालों से ऐसी कार्रवाई की अनुमति देने की उम्मीद की जाती है।

ये काम होंगे अपराध

इसके अलावा नोटिफिकेशन में उन कार्यों का भी विस्तार से जिक्र किया गया है जो कानून के तहत अपराध माने जाते हैं। इनमें सवालों के जवाब देने से मना करना, गलत जानकारी देना, जनगणना अधिकारियों को उनके कर्तव्यों में बाधा डालना और उन्हें परिसर में प्रवेश से रोकना शामिल है। यह जनगणना के उद्देश्यों के लिए इमारतों पर लगाए गए किसी भी निशान या नंबर के साथ छेड़छाड़ करने या उन्हें हटाने पर भी रोक लगाता है। उल्लंघन करने पर लगने वाले दंड का भी जिक्र किया गया है। जो लोग नियमों का पालन न करने या काम में रुकावट डालने के दोषी पाए जाएंगे, उन्हें जनगणना एक्ट के तहत तय किए गए जुर्माने या अन्य कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ सकता है। इस नोटिफिकेशन में इस बात पर जोर दिया गया है कि जनगणना अधिकारियों द्वारा जारी किए गए कानूनी निर्देशों का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गोपनीय रहेगी जानकारी

इस अधिसूचना में यह भी भरोसा दिलाया गया है कि जनगणना के दौरान इकट्ठा की गई सभी जानकारी गोपनीय रहेगी। इस डेटा का इस्तेमाल पूरी तरह से सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और इसे कानूनी कार्यवाही में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इस प्रावधान का मकसद निवासियों को यह भरोसा दिलाना है कि उनकी निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी और उसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

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