विदेश में रह रहे आरोपी के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर रद्द, दिल्ली HC ने बताई इसकी बड़ी वजह
दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि मजिस्ट्रेट को यह बताया गया हो कि आरोपी विदेश में रह रहा है और उसका पता भी पुलिस के पास उपलब्ध है। पीठ ने पाया कि CRPC की धाराओं 82 व 83 के तहत शुरू की गई कार्यवाही त्रुटिपूर्ण थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी भगोड़ा आदेश व लुकआउट सर्कुलर (LOC) को रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने की कोई ठोस कोशिश ही नहीं की। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी मदद लेने का प्रयास नहीं हुआ।
पीठ ने पाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धाराओं 82 व 83 के तहत शुरू की गई कार्यवाही त्रुटिपूर्ण थी, क्योंकि आरोपी को उसके ज्ञात विदेशी पते पर नोटिस देने की कोशिश ही नहीं की गई। मामला 2019 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें सत्र अदालत ने आरोपी को घोषित व्यक्ति (भगोड़ा) घोषित कर दिया था और उसके खिलाफ एलओसी जारी की गई थी। क्योंकि उसके खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया गया था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है आरोपी, पुलिस को भी पता था
याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि वह मार्च 2018 से ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है। पुलिस को उसका विदेशी पता भी मालूम था। फिर भी नोटिस केवल दिल्ली के पते पर भेजे जाते रहे। जिसके बाद पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि मजिस्ट्रेट को यह बताया गया हो कि आरोपी विदेश में रह रहा है और उसका पता भी पुलिस के पास उपलब्ध था।
जांच एजेंसी के संपर्क में भी था आरोपी
पीठ ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि आरोपी जांच एजेंसी के संपर्क में था। निर्देशों का पालन कर रहा था। पीठ ने कहा कि जो व्यक्ति लगातार जांच एजेंसी के संपर्क में है, उसे सामान्य रूप से फरार या कानून से बचने वाला नहीं माना जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि एजेंसी ने आरोपी को भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही की जानकारी नहीं दी, जबकि वह नियमित संपर्क में था जिससे याचिकाकर्ता का पक्ष मजबूत होता है।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए पीठ ने भगोड़ा आदेश व LOC को निरस्त कर दिया। जिसके बाद इस फैसले से पता चलता है कि विदेश में रहने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रिया का सही पालन करना अनिवार्य है।




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