दिल्ली में संपत्ति के फ्रीहोल्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया बंद, लोग परेशान
दिल्ली में नागरिक अपने फ्लैट, प्लॉट या अन्य संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड नहीं करवा पा रहे हैं। डीडीए की ऑनलाइन प्रक्रिया अभी पूरी तरह बंद है। प्रॉपर्टी डीलरों के अनुसार इस वजह से लोग काफी परेशान हो रहे हैं।

दिल्ली में फ्लैट, प्लॉट या अन्य संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड नागरिक नहीं करवा पा रहे हैं। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की अभी ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरीके से बंद है। दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलरों के अनुसार फ्रीहोल्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया बंद होने से दिल्ली के विभिन्न नागरिक परेशान हो रहे हैं। दिल्ली के एक प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि हर दिन काफी लोग ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं तब उन्हें जानकारी मिल रही है कि यह प्रक्रिया पूरी तरीके से बंद है। यह प्रक्रिया डेढ़ से दो महीने से बंद पड़ी है।
बढ़ सकता है कन्वर्जन जार्ज
दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलरों ने संभावना जताई है कि डीडीए प्रशासन लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड संपत्तियों में परिवर्तन करने के लिए कन्वर्जन चार्ज को बढ़ा सकता है। यदि किसी संपत्ति का कन्वर्जन चार्ज अभी 88,700 रुपये है। तब वह दो से तीन गुना तक हो सकता है।
यह है कारण
प्रॉपर्टी डीलरों ने फ्रीहोल्ड प्रक्रिया के बंद होने के पीछे कारण बताया है कि दिल्ली सरकार की तरफ से राजधानी में सर्कल रेट को बढ़ाने का फैसला लिया गया था। हालांकि, इस फैसले के संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। डीडीए द्वारा दिल्ली सरकार के नए सर्कल रेट को अपनाने का निर्णय लिया है। इन कारणों से डीडीए ने फ्रीहोल्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया को बंद कर दिया है।
मंत्रालय के साथ बैठक कर उचित फैसला लेंगे
इस संबंध में डीडीए अधिकारियों ने बताया कि हमारी कोशिश है कि नागरिकों को एक समान संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराने के लिए कन्वर्जन चार्ज का भुगतान करने की सुविधा प्रदान हो। इस मामले को लेकर आगामी दिनों में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। जिसमें कोई निर्णय लिया जा सकता है।
फ्रीहोल्ड कराना है महत्वपूर्ण
प्रॉपर्टी डीलर ने बताया कि संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराना महत्वपूर्ण है। संपत्ति के फ्रीहोल्ड कराने के बिना संपत्ति बेचना व उस पर बैंक से लोन लेना कठिन हो जाता है। इसके अतिरिक्त निर्धारित समय अवधि पर संपत्ति को फ्रीहोल्ड कराने के लिए कन्वर्जन शुल्क न कराने पर हर साल पेनल्टी भी बढ़ती है। अब इन सब कारणों से कन्वर्जन चार्ज बढ़ने की आशंका से लोग अपनी ही संपत्ति को लेकर उलझन में हैं।




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