दिल्ली एम्स में अब सर्जरी के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार, 4 गुना बढ़ी रफ्तार
एम्स के सर्जरी ब्लॉक में पिछले एक साल में रिकॉर्ड 10 हजार से अधिक सर्जरी की गईं। चार नए ऑपरेशन थियेटर शुरू होने से यह क्षमता और बढ़ेगी जिससे वेटिंग समय कम होगा। एम्स में किडनी प्रत्यारोपण में भी बड़ी राहत मिली है।

दिल्ली एम्स में सर्जरी ब्लॉक बनने से जनरल सर्जरी विभाग में पहले के मुकाबले मरीजों की सर्जरी करीब चार गुना बढ़ गई है। यही वजह है कि इस सर्जरी ब्लॉक में एक वर्ष में दस हजार से अधिक मरीजों की सर्जरी हुई। जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुंबर ने किसी एक विभाग द्वारा वर्ष भर में सबसे अधिक सर्जरी करने का दावा किया और कहा कि सर्जरी बढ़ने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है। सर्जरी के लिए इंतजार कम हुआ है।
शुरू होंगे 4 नए ओटी
जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील चुंबर ने कहा कि दिल्ली एम्स में सर्जरी के लिए इंतजार कम हुआ है। जल्द ही सर्जरी ब्लॉक में चार नए ओटी (ऑपरेशन थियेटर) शुरू किए जाएंगे। इससे वर्तमान समय की तुलना में सर्जरी की क्षमता 50 प्रतिशत और बढ़ जाएगी। पहले जनरल सर्जरी विभाग में पहले वर्ष भर में करीब ढाई हजार मरीजों की सर्जरी हो पाती थी क्योंकि ओटी कम थे।
पहली बार एक साल में 10,096 मरीजों की सर्जरी
साल 2021 में सर्जरी ब्लॉक में चिकित्सा सेवाएं शुरू होने के बाद सुविधाएं बढ़ी। इसमें बने 12 ओटी में से अभी 8 ओटी संचालित हो रहे हैं। सुविधाएं बढ़ने से पिछले साल जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने पहली बार 10,096 मरीजों की सर्जरी की। इसमें हर्निया, गॉल ब्लैडर, फेफड़े, पैंक्रियाज, पेट से संबंधित सर्जरी, किडनी प्रत्यारोपण, कैंसर सहित सहित हर तरह के मरीजों की सर्जरी शामिल है।
एक साल में 15 हजार हो जाएगी सर्जरी की क्षमता
चार नए ओटी शुरू होने पर वर्ष भर में 15,000 मरीजों की सर्जरी की जाएगी। इससे सर्जरी की वेटिंग कम हो जाएगी। प्रोफेसर डॉ. वीके बंसल ने बताया कि कुल सर्जरी में 40 प्रतिशत कैंसर मरीजों की सर्जरी शामिल है। इससे कैंसर मरीजों को भी बड़ी राहत मिली है।
किडनी प्रत्यारोपण की वेटिंग हुई कम
137 मरीजों की किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी की गई। उन्हें किसी करीबी रिश्तेदार ने किडनी दान की। डॉक्टरों का कहना कि नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा मरीज और डोनर का वर्कअप करने के बाद अब करीब डेढ़ माह में सर्जरी हो जाती है। इसलिए प्रत्यारोपण के लिए वर्कअप के बाद भी छह-सात माह इंतजार करना पड़ता था।
829 मरीजों की हुई स्तन कैंसर की सर्जरी
प्रोफेसर डॉ. अनीता धर ने बताया कि 1007 मरीजों के स्तन की सर्जरी की गई। इसमें से 829 मरीजों के स्तन कैंसर की सर्जरी हुई। स्तन कैंसर से पीड़ित महिला मरीज यदि इलाज के लिए जल्दी पहुंचे तो इलाज का परिणाम बेहतर हो सकता है।
प्रत्यारोपण में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स की होगी शुरुआत
एम्स किडनी प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए जल्दी ही सुपर स्पेशियलिटी कोर्स शुरू करेगा। ताकि अधिक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार किए सकें।
सर्जरी ब्लॉक में एक वर्ष में इलाज के आंकड़े
मरीज- संख्या- प्रतिशत
कुल भर्ती मरीज- 11921- --
कुल सर्जरी- 10,096- --
ओपन सर्जरी- 5116- 50.7
लैप्रोस्कोपी सर्जरी- 4161- 41.2
रोबोटिक सर्जरी- 819- 8.1
नियमित सर्जरी- 8994- 89.1
इमरजेंसी सर्जरी- 1102- 10.9
पुरुष मरीज- 5531- 46.4
महिला मरीज- 6390- 53.6
थोरेसिक सर्जरी को अलग विभाग के रूप में स्थापित करने का प्रयास
जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया सर्जरी ब्लॉक में 180 मरीजों के फेफड़े की बीमारियों की सर्जरी की गई। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से थोरेसिक सर्जरी को अलग स्पेशियलिटी के रूप में स्थापित करने की बात चल रही है। इससे फेफड़े के मरीजों को फायदा होगा।




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