घटिया मजाक, शर्मनाक; केजरीवाल के पत्र पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा अटैक
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में हाई कोर्ट में अपनी पैरवी नहीं करने की 'आप' प्रमुख अरविंद केजरीवाल की घोषणा को सोमवार को 'घटिया मजाक' बताया और कहा कि बेगुनाही शोर मचाने से नहीं बल्कि अदालत के फैसले से साबित होगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में हाई कोर्ट में अपनी पैरवी नहीं करने की 'आप' प्रमुख अरविंद केजरीवाल की घोषणा को सोमवार को 'घटिया मजाक' बताया और कहा कि बेगुनाही शोर मचाने से नहीं बल्कि अदालत के फैसले से साबित होगी। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि आबकारी मामले में न तो वह व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए से उनके समक्ष पेश होंगे।
'आप' नेता ने न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद केजरीवाल ने चार पन्नों के एक पत्र में न्याय नहीं मिलने की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर उनकी गंभीर चिंताएं हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि हमेशा न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करना और संवैधानिक संस्थाओं को "गाली" देना, यही केजरीवाल की कार्यशैली है और यही इनकी मानसिकता बन गई है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री शराब घोटाले में शामिल हैं और उनके खिलाफ चार्जशीट दायर है और वह न्यायपालिक पर सवाल उठाकर न्यायाधीश और कोर्ट बदलवाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि अदालत का फैसला उनके खिलाफ आ सकता है।
'वकील भी हम है, गवाह भी हम है और जज भी हम है'
उन्होंने पूछा कि अदालत में अपनी पैरवी नहीं करने का केजरीवाल का व्यवहार और जस्टिस पर इल्जाम लगाना क्या उन्हें शोभा देता है? रेखा गुप्ता ने कहा, केजरीवाल साहब कहते हैं कि वकील भी हम है, गवाह भी हम है और जज भी हम है। सबकुछ वही हैं तो इस न्यायिक व्यवस्था की जरूरत क्या है। मुख्यमंत्री ने कहा,एक चोर, ऊपर से मचाए शोर। शोर मचा मचा कर आप को यह दिखाना चाहते है कि वह (केजरीवाल) बेगुनाह है। बेगुनाही के तो सबूत और बेगुनाही की परीक्षा तो अदालतों में देनी पड़ेगी। उन्होंने महात्मा गांधी और भगत सिंह से तुलना को भी शर्मनाक बताया।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल द्वारा अदालत में अपनी पैरवी नहीं करना और सत्याग्रह की बात करना 'एक घटिया मजाक' है जिसे मजाक न तो दिल्ली की जनता पसंद करती है और न ही न्यायिक व्यवस्था की इसकी इजाजत देती है।
केजरीवाल ने पत्र में क्या लिखा?
केजरीवाल ने सोमवार को जस्टिस शर्मा को लिखे पत्र में कहा, न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांतों को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने इस मामले में उनके सामने पेश नहीं होने का फैसला किया है।
उन्हाेंने कहा, मैंने हितों के टकराव के कारण जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मेरे मामले में खुद से हटने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने ने खुद ही सुनने का फैसला दिया। इस मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा जो भी फैसला सुनाएंगी, उस पर मैं अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हूं। साथ ही उन्होंने साफ करते हुए कहा कि मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और पूरा सम्मान करता हूं, क्योंकि जब मेरे खिलाफ साजिशें हुई तो न्यायपालिका ने ही मुझे दोष मुक्त करके न्याय दिया।




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