RSS के इवेंट में नहीं जाता; SC के पूर्व जज की टिप्पणी से केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को घेरा
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि आबकारी मामले में वह न तो खुद उनके समक्ष पेश होंगे और न ही उनकी ओर से कोई वकील पैरवी करेगा।

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि आबकारी मामले में वह न तो खुद उनके समक्ष पेश होंगे और न ही उनकी ओर से कोई वकील पैरवी करेगा। चार पन्नों के इस पत्र में केजरीवाल ने न्याय नहीं मिलने की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर उनकी गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने पत्र में लिखा, मैंने फैसला किया है कि मैं इस मामले में उनके समक्ष पेश नहीं होऊंगा और कोई दलील भी नहीं दूंगा। केजरीवाल ने पत्र में लिखा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए। इस दौरान आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में जाने को लेकर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी जिक्र किया।
केजरीवाल ने पत्र में दावा किया कि उन्होंने अपनी 'रिक्यूजल' अर्जी में कई गंभीर चिंताएं जताई थीं, जिनमें जस्टिस शर्मा का आरएसएस के कानूनी मोर्चे, 'अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद' (ABAP) के साथ बार-बार सार्वजनिक तौर पर जुड़ना शामिल है। अपने पक्ष को मजबूती देने के लिए केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय एस. ओका की हालिया टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि जस्टिस ओका ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि उन्हें पद पर रहते हुए अधिवक्ता परिषद द्वारा आमंत्रित किया जाता, तो वह विनम्रतापूर्वक मना कर देते क्योंकि उनके अनुसार इस संगठन का राजनीतिक झुकाव है।
जस्टिस ओका ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस अभय एस ओका ने हाल ही में नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि अगर उन्हें आरएसएस से जुड़े एबीएपी द्वारा मौजूदा न्यायाधीश के रूप में बुलाया जाता, तो वे उनके कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते। ये टिप्पणियां उन्होंने एबीएपी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कीं, हालांकि वे अब मौजूदा न्यायाधीश नहीं हैं। उन्होंने कहा,अगर एक मौजूदा न्यायाधीश के रूप में मुझे अधिवक्ता परिषद द्वारा उनके मंच पर बोलने के लिए आमंत्रित किया जाता, तो मैं विनम्रतापूर्वक मना कर देता क्योंकि अधिवक्ता परिषद का राजनीतिक झुकाव है।
अरविंद केजरीवाल ने पत्र में क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि जस्टिस शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग करने के अनुरोध संबंधी उनकी पिछली याचिका को व्यक्तिगत हमले के रूप में लिया गया। इस याचिका को 20 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था। पत्र में केजरीवाल ने कहा कि अब जस्टिस शर्मा की अदालत में निष्पक्ष सुनवाई होना असंभव हो गया है। केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को सुनवाई से अलग करने के अनुरोध के संबंध में याचिका में पहले बताए गए दो आधार को भी दोहराया।
उन्होंने पत्र में लिखा, पहला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) के साथ आपकी बार-बार सार्वजनिक भागीदारी का मुद्दा। केजरीवाल ने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा की संतान केंद्र सरकार के कई अधिवक्ता पैनल में पेशेवर रूप से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने लिखा, जब मैं अपना पक्ष रखने के लिए माननीय न्यायाधीश के सामने खड़ा था, तो मन में बस एक ही सवाल था कि क्या मुझे न्याय मिलेगा? आज, यही सवाल मेरी अंतरात्मा में और गहराई तक समा गया है। उन्होंने लिखा, मुझे पता है कि कुछ लोग मुझे न्यायपालिका के 'खिलाफ' बताएंगे। लेकिन यह कैसे हो सकता है, जबकि मुझे खुद न्यायपालिका से राहत मिली है। जमानत के आदेश भी और अभी हाल में आरोप मुक्त होना भी - ये सब मुझे न्यायपालिका से मिला। आज मैं आजाद हूं तो न्यायपालिका की बदौलत।'




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