जज साहिबा ने खुद माना है; जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ केजरीवाल ने क्या दावा किया
Arvind Kejriwal Satyagrah: केजरीवाल ने वीडियो में कहा कि जज साहिबा ने मेरी दलील को खुद स्वीकार किया था कि वे आरएसएस के प्रोग्राम में गईं, लेकिन मेरी प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया। अब मैं उनकी कोर्ट न पेश होऊंगा और न ही वकील पेश करूंगा।

Arvind Kejriwal Satyagrah: आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब घोटाला मामले को नया रूप दे दिया है। उन्होंने हाई कोर्ट जज स्वर्ण कांता शर्मा के बहिष्कार के साथ गांधीजी के सत्याग्रह का ऐलान किया। 9 मिनट 40 सेकंड के वीडियो में केजरीवाल ने कहा कि इस केस में न तो वे जस्टिस शर्मा की कोर्ट में पेश होंगे और न ही वकील रखेंगे। उन्होंने जज शर्मा को न सिर्फ पक्षपाती कहा, बल्कि यह भी बोल गए कि उनसे न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है। यह भी दावा किया कि जस्टिस शर्मा ने मेरी दलील को खुद स्वीकार किया, लेकिन प्रार्थना अस्वीकार कर दी।
अरविंद केजरीवाल ने सोमवार सुबह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को चिट्ठी लिखी। अपने संदेश में उन्होंने दो प्रमुख बातों का जिक्र किया। केजरीवाल ने कहा कि मैंने जब वकील के तौर पर जज शर्मा के समक्ष अपनी दलीलें रखी तो दो बातों पर स्पष्ट बात रखी। पहला, वो आरएसएस विचारधारा विचारधारा से जुड़े कार्यक्रम में गईं। एक नहीं चार बार...। खुद जज साहिबा ने माना है कि वे उन कार्यक्रमों में गई हैं। मैंने डर जताया कि हमारी विपक्षी विचारधारा से जुड़े कार्यक्रम में जज शर्मा गईं हैं तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा? दूसरा उनके बच्चे केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वकीलों के पैनल में हैं और जो वकील तुषार मेहता मेरे सामने हैं, वे ही उनके बच्चों के केस तय करते हैं। ऐसे में मुझे न्याय कैसे मिलेगा? मेरी दलीलों को खारिज करते हुए जस्टिस शर्मा ने मेरा केस अपने पास ही रखा।
अन्याय करने वाले को सुधरने का मौका
केजरीवाल ने आगे कहा कि जब न्याय नहीं मिलता तो बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिखाया है। बापू ने कहा था कि अगर कभी किसी अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं, बातचीत होना चाहिए। अपनी बात अन्याय करने वाले सामने पूरी विनम्रता के साथ रखनी चाहिए। उसे सुधरने का मौका मिलना चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी अगर न्याय नहीं मिले तो अंतरात्मा की आवाज सुनें।
मेरे मन में नफरत या गुस्सा नहीं
केजरीवाल ने वीडियो में कहा कि अगर अंतरआत्मा की आवाज कहती है कि इंसाफ नहीं हुआ तो शांति से सत्याग्रह करना चाहिए। चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले व्यक्ति के प्रति किसी प्रकार की नफरत या गुस्सा नहीं होना चाहिए। मैंने भी बातचीत से शुरुआत की। मैंने जस्टिस शर्मा से विनम्रता से कहा कि मेरा केस हाई कोर्ट के किसी भी जज के सामने प्रस्तुत किया जाए, लेकिन उन्होंने मेरी प्रार्थना को अस्वीकार किया। उन्होंने फैसला किया कि वे इस सुनवाई से खुद को अलग नहीं करेंगी और यह केस वे खुद सुनेंगी।
जज शर्मा की कोर्ट में न पेश होऊंगा, न वकील पेश करूंगा
उनके इस फैसले को सुनने के बाद मैं पूरी विनम्रतापूर्वक असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और प्रबल हो गई है कि क्या मुझे इंसाफ मिलेगा? इसलिए बापू के सत्याग्रह के साथ अब मैंने फैसला किया है कि मैं इस केस में जस्टिस शर्मा के कोर्ट में न तो स्वयं पेश होउंगा और न ही कोई वकील पेश करूंगा। जस्टिस शर्मा जो भी फैसला सुनाएंगी... उस पर समय आने पर जो भी मेरे कानूनी अधिकार हैं... जैसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना... और सभी बेहतर कदम लेने के लिए स्वीकृत हूं। मैंने आज यह पत्र लिखकर जस्टिस शर्मा को सूचित कर लिया है।
बताया- अभी सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा
केजरीवाल ने आगे कहा कि अगर भविष्य में मेरे खिलाफ जस्टिस शर्मा के पास कोई भी केस आता है, जिसमें भाजपा, केंद्र सरकार या तुषार मेहता जी नहीं हैं, तो मैं उनके समक्ष जरूर पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि अगर मैं जस्टिस शर्मा फैसले से असहमत हूं तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं? यह पूरा मामला बहुत नाजुक और संवेदनशील है। कानून को ध्यान में रखते हुए, न्यायपालिका को ध्यान में रखते हुए और लोगों के न्यायपालिका में भरोसे को ध्यान में रखते हुए मैं यह कदम उठा रहा हूं। यह कदम मैं किसी विरोध के लिए नहीं उठा रहा हूं। मेरा कदम न्यायपालिका को चुनौती देना नहीं है। मैंने अदालत में अपना पूरा सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। इसी न्यायपालिका के कारण आजाद घूम रहा हूं। मेरा मकसद है... लोगों के भरोसे को और मजबूत करना कि जरूरत पड़ने पर उन्हें न्यायपालिका से न्याय जरूर मिलेगा।




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