'राघव चड्ढा बगावत कांड' पर AAP के संजय सिंह ने ‘ईमानदारी’ से क्या कबूला
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा वाली बगावत को लेकर कहा है कि उन्हें संदीप पाठक को लेकर ऐसा अनुमान नहीं था। उन्होंने कहा कि भनक ही नहीं लगी कि वह पार्टी छोड़ सकते हैं।

इन दिनों हल्ला तो तृणमूल कांग्रेस में टूट-फूट को लेकर अधिक है, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) भी 'राघव चड्ढा बगावत कांड' को अब तक पूरी तरह समझ नहीं पाई है। पार्टी नेतृत्व अब भी हैरान है कि आखिर कैसे संदीप पाठक जैसे नेता ने साथ छोड़ दिया, जिन्हें संगठन में इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई थी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्वीकार किया है कि उन्हें या पार्टी में किसी को इस बात का अहसास नहीं था कि संदीप पाठक ऐसा कोई कदम उठा सकते हैं।
एक पॉडकास्ट में 'आप' के तेजतर्रार नेता और संसद में अपने आक्रामक अंदाज के लिए चर्चित सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा के समेत सात सांसदों के पार्टी छोड़ने पर विस्तार से चर्चा की और बेबाकी से जवाब दिया। संजय सिंह ने राघव चड्ढा को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन वह संदीप पाठक को लेकर बेहद हैरान दिखे। उन्होंने अशोक मित्तल समेत कुछ राज्यसभा सांसदों को डराने और दबाव डालकर तोड़ने का आरोप लगाया।
संजय सिंह ने मरने दम तक उनके भाजपा में ना जाने का दावा करते हुए राघव चड्ढा वाली बगावत पर जवाब दिया, 'आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि हर आदमी एक ही हौसले का होगा। अशोक मित्तल पर छापा पड़ा ईडी का, तीन दिन तक चलता रहा। उसके बेटे को प्रताड़ित किया गया, दबाव बनाया गया। चिट्ठी सामने रख दी गई साइन कर यदि बेटे को बचाना है तो। दो-तीन और थे जिनके कारोबार था, उनको डराया धमकाया गया, साइन करा लिया गया।'
संदीप पाठक को लेकर संजय सिंह हैरान
राघव चड्ढा और 'आप' के बीच दरार काफी बढ़ गई थी और बगावत से एक महीने पहले जब उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाया गया था तभी यह साफ हो गया था कि राहें अब अलग होने वाली हैं। हालांकि, अचानक उनके साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे राघव चड्ढा को लेकर सभी लोग हैरान रह गए थे। संजय सिंह ने खुद को भी इसी आश्चर्च में बताया। पाठक को लेकर किए गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'संदीप पाठक क्यों गए वही बता सकते हैं। मुझे भी आश्चर्य हुआ संदीप पाठक के जाने से, अफसोस हुआ।'
पता ही नहीं चला कि जाने वाले हैं: संजय सिंह
क्या संदीप पाठक को रोकने की कोशिश की गई? इस सवाल के जवाब में संजय सिंह ने कहा कि इसकी भनक ही नहीं लगी। उन्होंने साफगोई से कहा, 'रोकने की कोशिश तब होगी जब मैं जानूं कि आप जा रहे हो, या आपके मन में कुछ ऐसा है कि पार्टी छोड़ सकते हो। यह पूरी ईमानदारी से बता रहा हूं, इसमें कोई राजनीतिक चालबाजी नहीं कर रहा हूं। सीधे-सीधे बता रहा हूं कि कभी कोई एहसास भी नहीं हुआ तनिक भी कि ये पार्टी छोड़ सकते हैं। जैसे आपको (एंकर) अहसास नहीं था, वैसे मुझे भी नहीं था।' संदीप पाठक को नजरअंदाज किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर सांसद ने कहा, 'यह तो गलत बात है, संगठन के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी संदीप पाठक को दी गई थी। पंजाब में जिम्मेदारी दी गई, दिल्ली में दी गई, राज्यसभा में दी गई। यह तो गलत है कि उनकी उपेक्षा हो रही थी। ऐसा नहीं था।'




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