delhi Hc to raghav chadha Criticism of political decisions cannot be termed as violation of personality rights पैसे लेकर भाजपा में गए; राघव चड्ढा के खिलाफ ऐसी बातों पर अदालत ने क्या कहा, Ncr Hindi News - Hindustan
More

पैसे लेकर भाजपा में गए; राघव चड्ढा के खिलाफ ऐसी बातों पर अदालत ने क्या कहा

राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने चड्ढा के वकील से कहा कि यह उनके मुवक्किल के राजनीतिक फैसले की आलोचना है।

Thu, 21 May 2026 02:51 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
पैसे लेकर भाजपा में गए; राघव चड्ढा के खिलाफ ऐसी बातों पर अदालत ने क्या कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ कथित अपमानजक पोस्ट्स को हटवाने के लिए आदेश की मांग की है। इनमें कथित तौर पर दिखाया गया है कि राघव चड्ढा ने खुद को 'पैसों के लिए बेचा।' जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा कि पहली नजर में इन पोस्ट में चड्ढा के भाजपा में जाने के राजनीतिक फैसले की आलोचना की गई है और अलोचना-मानहानि के बीच एक बारीक सीमा है।

शुरुआत में अदालत ने मौखिक रूप से चड्ढा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव नायर से कहा कि प्रथम दृष्टया इस केस में 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकार) शामिल नहीं है। अदालत ने कहा, 'अन्य फैसलों से अलग, यहां सिर्फ आलोचना है राजनीतिक क्षेत्र में लिए गए फैसलों की। यह राजनीतिक फैसले की आलोचना पर टिप्पणी है।' चड्ढा की ओर से जिस तस्वीर पर आपत्ति जताई गई थी उसके संदर्भ में अदालत ने कहा, 'यह निशाना या आलोचना है, आप अपनी प्रार्थना देखिए। यह मानहानि का केस नहीं, इसका आधार पर्सनैलिटी राइट्स है।'

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मान नहीं रहे AAP नेता, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सवाल पर क्या बोल गए संजय

अदालत ने अंतरिम राहत पर क्या कहा

इस पर नायर ने कहा कि वह केवल मानहानिकारक पोस्ट के संबंध में अंतरिम राहत की मांग कर रहे हैं। अदालत ने जवाब दिया कि मानहानि और आलोचना के बीच की रेखा बहुत पतली है और प्रसिद्धि से जुड़े अन्य मामलों के विपरीत, यह अंतरिम राहत देने का मामला नहीं हो सकता। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने कहा, 'यह बहस का विषय होगा। मुझे एक एमिकस नियुक्त करने दीजिए।' नायर ने अंतरिम राहत पर जोर दिया तो अदालत ने कहा, 'पर्सनैलिटी राइट्स के कॉमर्शियल इस्तेमाल और आलोचना में अंतर है। शशि थरूर (वाला फैसला) उनके बोलने के तरीके और उनके व्यवहार पर आधारित है।'

राघव चड्ढा की ओर से और क्या दलीलें दी गईं

बेंच ने आगे कहा कि राजनीतिक नेताओं को व्यंग्य, कार्टून और सार्वजनिक जीवन में आलोचनाओं का सामना करना पड़ता रहा है। उन्होंने आरके लक्ष्मण के कार्टून्स का भी उदाहरण दिया। राघव चड्ढा के वकील ने दलील दी कि ऑनलाइन सर्कुलेट किए जा रहे कई पोस्ट सिर्फ राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि मानहानिकारक हैं। सांसद को इस रूप में चित्रित किया जा रहा है कि उन्होंने पैसों के बदले पाला बदला है। नायर ने अदालत के सामने पेश की गईं कुछ तस्वीरों का जिक्र करते हुए कहा, 'उन्हें साड़ी पहने हुए दिखाया गया है। प्रधानमंत्री को पैसे बांटते और बरसाते हुए दिखाया गया है।' नायर ने कहा, 'इसमें मानहानि और प्रतिष्ठा को छवि पहुंचाना शामिल है। वे कह रहे हैं कि वह (राघव) पैसों के लिए गए। यह सही आलोचना नहीं हो सकती है।'

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का केजरीवाल ने किया था 'बहिष्कार', नई बेंच ने ली चुटकी

क्या है राघव चड्ढा की मांग

अपनी याचिका में चड्ढा ने एआई से बने डीपफेक, मॉर्फ्ड वीडियो, सिंथेटिक वॉयस क्लोन, मनगढ़ंत भाषण व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर शेयर किए जा रहे दूसरे धोखेबाज डिजिटल मटीरियल को बनाने और सर्कुलेट करने पर रोक लगाने के लिए निर्देश मांगे हैं। याचिका में कहा गया है कि एआई टूल्स के जरिए चड्ढा की तस्वीर, आवाज़, समानता व पहचान का बिना इजाजत इस्तेमाल जनता को गुमराह कर सकता है। याचिका में कहा गया है कि इससे चड्ढा की छवि पर बुरा असर डाल सकता है। उन्होंने डिजिटल स्पेस में अपने व्यक्तित्व के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सुरक्षा मांगी है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:'काबा-मदीना' वाली सायोनी घोष के लिए क्यों संजय सिंह ने आगे कर दी अपनी गर्दन
लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।