किले में तब्दील दिल्ली; परेड में आकर्षण का केंद्र होंगे ये अत्याधुनिक हथियार
गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। जल, थल और नभ से चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए छह स्तरीय घेरा बनाया गया है जिसमें दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 15 हजार जवान तैनात हैं।

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जल, थल और आसमान तीनों जगह से चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए छह स्तरीय घेरा बनाया गया है जिसमें दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 15 हजार जवान तैनात हैं। सुरक्षा में एंटी एयरक्राफ्ट गन, सौ से ज्यादा स्नाइपर्स और एनएसजी कमांडो भी शामिल किए गए हैं। इस रिपोर्ट में जानें दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मद्देनजर कैसी है तैयारी…
ये हथियार होंगे आकर्षण का केंद्र
राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर सोमवार को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणाली, सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर और अर्जुन टैंक मुख्य आकर्षण होंगे। अधिकारियों ने बताया कि भारत सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी प्रगति, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत का प्रदर्शन करेगा।
ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हथियारों की होगी नुमाइश
इस बार परेड में नई सैन्य इकाइयां और ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल हुए प्रमुख हथियारों के मॉडल भी दिखाए जाएंगे। इस समारोह का मुख्य विषय वंदे मातरम के 150 वर्ष रखा गया है। कार्यक्रम का नेतृत्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। परेड सुबह 10.30 बजे शुरू होगी और लगभग 90 मिनट तक चलेगी।
भैरव बटालियन पहली बार
परेड में पहली बार नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबन रेजिमेंट शामिल होंगे। यही नहीं परेड में पहली बार जांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट भी हिस्सा लेंगे।
दिखेंगे 61 कैवेलरी के घुड़सवार दस्ते
अधिकारियों ने बताया कि एक नई पहल के तहत 61 कैवेलरी के घुड़सवार दस्ते के जवान अब युद्ध के साजो-सामान के साथ दिखाई देंगे। इसके साथ ही सेना के स्वदेशी हथियार और अन्य प्रमुख उपकरण जवानों के साथ एक विशेष युद्ध संरचना में कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ेंगे। सेना की 61वीं घुड़सवार रेजिमेंट हमेशा से परेड में सबसे आगे रहने वाली टुकड़ी रही है जो अपनी पारंपरिक वर्दी और खास टोपी के लिए जानी जाती है।
6 लेयर रहेगी सुरक्षा
परेड मार्ग की सुरक्षा के लिए छह स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कर्तव्य पथ की बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी 15 हजार जवानों को सौंपी गई है। सुरक्षा के घेरे में दिल्ली पुलिस के साथ अतिरिक्त रिजर्व पुलिस कंपनियां, क्विक रिस्पांस टीम, स्वाट कमांडो और बम निरोधक दस्ते शामिल होंगे। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है।
आंतरिक सुरक्षा घेरे में एनएसजी कमांडो
राष्ट्रपति भवन से लेकर पूरे परेड मार्ग की महत्वपूर्ण जगहों पर अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। सबसे खास आंतरिक सुरक्षा घेरे में सेना के जवान, एनएसजी कमांडो और खुफिया एजेंसियों के विशेष अधिकारी शामिल हैं। ये जवान महत्वपूर्ण अतिथियों की सुरक्षा करने के साथ आसपास की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। ये जवान लगतार सीधे कंट्रोल रूम के संपर्क में रहेंगे। पल-पल की फीड इन्हें मिलती रहेगी।
इमारतों पर स्नाइपर्स तैनात
परेड मार्ग की ऊंची इमारतों पर रविवार रात से ही 100 से ज्यादा स्नाइपर्स तैनात कर दिए गए हैं। ड्रोन, पतंग और अन्य उड़ती हुई वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कैमरों के सामने से गुजरने वाले हर व्यक्ति को स्कैन कर उसकी जानकारी तुरंत भेजने की व्यवस्था की गई है ताकि संदिग्ध की पहचान तुरंत सुनिश्चित की जा सके। जवान कंट्रोल रूम से कनेक्ट रहेंगे।

जल में भी सुरक्षा
सुरक्षा के लिए केवल जमीन और आसमान ही नहीं वरन यमुना के जलमार्ग को भी सुरक्षित बनाया गया है। पुलिसकर्मी खादर वाले इलाकों में लगातार गश्त कर रहे हैं। यमुना में नावों और मोटर बोट के जरिए नजर रखी जा रही है। दिल्ली में सख्त ट्रैफिक पाबंदिया लगा दी गई हैं। सीमाओं पर भी सख्त पहरा है। कुल मिलाकर कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा वक्त में दिल्ली किले में तब्दील हो चुकी है। सुरक्षा ऐसी है कि परिंदा भी पर ना मार सके।




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