गुरुग्राम में सीवर सफाई के दौरान 2 मजदूरों की मौत, तीसरे की हालत गंभीर; जहरीली गैस बनी काल
गुरुग्राम में सीवर की सफाई के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है, जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से दो सफाईकर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस के मुताबिक यह घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे हुई।

गुरुग्राम में सीवर की सफाई के दौरान बड़ा हादसा सामने आया है, जहां जहरीली गैस की चपेट में आने से दो सफाईकर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस के मुताबिक यह घटना मंगलवार रात करीब 10 बजे हुई। जानकारी के अनुसार, फिरोजपुर झिरका नगरपालिका के सफाईकर्मी एनएच-248ए स्थित अंबेडकर चौक के पास सीवर की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान एक सफाईकर्मी काफी देर तक बाहर नहीं आया। जब वह बाहर नहीं निकला, तो दूसरा कर्मचारी उसे देखने के लिए सीवर में उतरा, लेकिन वह भी वापस नहीं लौटा।
इसके बाद मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तीसरे व्यक्ति को नीचे भेजा। तीसरा कर्मचारी जैसे ही अंदर गया, उसने चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया और ऊपर मौजूद लोगों को सतर्क किया। इससे अंदाजा लगाया गया कि सीवर के अंदर जहरीली गैस फैली हुई है।घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। जेसीबी मशीन की मदद से तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दो सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी थी। तीसरे कर्मचारी को गंभीर हालत में तुरंत मंडी खेड़ा स्थित अल आफिया सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हादसा जहरीली गैस के सांस के जरिए शरीर में जाने (इनहेल करने) के कारण हुआ। फिलहाल मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, इस मामले में ठेकेदार घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर सीवर सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है, जहां बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम करने वाले कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
आपको बताते चलें कि सीवर और नालों में सड़ते कचरे से कई तरह की जहरीली गैसें बनती हैं। इनमें सबसे खतरनाक हाईड्रोजन सल्फाइड (H₂S) होती है, जिसे ‘सड़े अंडे’ जैसी बदबू से पहचाना जाता है। इसके अलावा मीथेन (CH₄), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और अमोनिया (NH₃) भी मौजूद रहती हैं। ये गैसें ऑक्सीजन की जगह ले लेती हैं, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है और व्यक्ति कुछ ही मिनटों में बेहोश हो सकता है।
सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति तब बनती है, जब हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा अधिक हो जाती है। यह गैस सूंघने की क्षमता को भी खत्म कर देती है, यानी व्यक्ति को खतरे का अंदाजा ही नहीं लगता। वहीं मीथेन ऑक्सीजन को कम कर दम घुटने का कारण बनती है और कार्बन मोनोऑक्साइड शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देती है। यही वजह है कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतरना अक्सर जानलेवा साबित होता है।




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