HC में केजरीवाल की दलीलों पर दिग्विजय सिंह ने की तारीफ, जज को लेकर भी कही बड़ी बात
अदालत में सुनवाई के वीडियो पर मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रिएक्शन देते हुए अरविंद केजरीवाल की तारीफ की है। इसके साथ ही उन्होंने न्यायमूर्ति को लेकर टिप्पणी भी की।

आबकारी नीति घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी पैरवी खुद करते नजर आए। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की तीखी टिप्पणियों के बीच अदालत में केजरीवाल ने विस्तार से अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई के वीडियो पर मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रिएक्शन देते हुए अरविंद केजरीवाल की तारीफ की है। उन्होंने केजरीवाल को "बहुत हिम्मत वाला" कहा। इसके साथ ही न्यायमूर्ति के लिए भी बड़ी बात कही।
केजरीवाल को बताया- बहुत हिम्मत वाला
दिग्विजय सिंह ने सुनवाई की वीडियो का एक हिस्सा एक्स पर शेयर करते हुए लिखा- "दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ लड़ने का फैसला "बहुत हिम्मत वाला" है। उन्होंने अपने केस में यकीनन एक सही स्कोरिंग पॉइंट हासिल किया है।" इसका आसान शब्दों में मतलब है कि केजरीवाल ने अपने केस में कानूनी तौर पर एक मजबूत दलील या पॉइंट हांसिल किया है।
जज को लेकर क्या बोले दिग्विजय सिंह
इसके बाद दिग्विजय सिंह ने सुनवाई कर रहीं जज के बारे में एक अहम टिप्पणी करते हुए बड़ी बात कही। उन्होंने लिखा- "माननीय न्यायमूर्ति सुश्री शर्मा को इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए।" दिग्विजय सिंह के समर्थन वाले इस ट्वीट पर अरविंद केजरीवाल ने जवाब देते हुए लिखा- "धन्यवाद दिग्विजय जी।"
जज बोलीं- मैं खुद को अलग नहीं कर सकतीं
आपको बता दें कि सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने भी न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा को इस मामले से हटने की अपील की थी। इस पर न्यायमूर्ति ने कहा था- "मैं खुद को अलग नहीं कर सकती।" उन्होंने आगे कहा- “रिक्यूज़ल सिर्फ़ दो वजहों से होगा। सबसे जरूरी बात यह है कि आपको लग रहा है कि मैं आपके साथ न्याय नहीं कर पाऊंगी या फिर मैं सीबीआई व ईडी को राहत दे रही हूं। ऐसा नहीं है। इसे साबित करने के लिए ठोस तथ्य पेश करें।”

न्यायमूर्ति के हटाए जाने की दलील पर क्या बोले केजरीवाल
न्यायमूर्ति शर्मा को सुनवाई से हटाए जाने के अनुरोध वाली अपनी याचिका पर दलीलें पेश करते हुए केजरीवाल ने कहा- सुनवाई से अलग किए जाने संबंधी कानून के तहत सवाल न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा या ईमानदारी का नहीं है, बल्कि वादी के मन में "उनके पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने की उचित आशंका" का है।

केजरीवाल बोले- क्या मुझे न्याय मिलेगा?
केजरीवाल ने दावा किया कि सीबीआई की याचिका और भाजपा के एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी से जुड़े एक अन्य मामले को छोड़कर, न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष किसी अन्य मामले की सुनवाई इतनी तेज "गति" से नहीं हो रही है। केजरीवाल ने कहा, “मैं स्तब्ध था और मुझे इस बात की आशंका है कि कहीं अदालत पक्षपातपूर्ण रवैया तो नहीं अपना रही है और क्या मुझे न्याय मिलेगा। इसकी इतनी जल्दी क्या थी? इसकी जरूरत क्यों थी?”




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