Why Opposition angry on Transgender bill in Lok Sabha what says Government क्या है ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ा संशोधन विधेयक, आखिर किस बात पर भड़का है विपक्ष, India News in Hindi - Hindustan
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क्या है ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ा संशोधन विधेयक, आखिर किस बात पर भड़का है विपक्ष

सरकार द्वारा मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े एक विधेयक का विरोध करते हुए विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि यह प्रस्तावित कानून हितधारकों के साथ परामर्श के बिना सदन में पेश किया गया है।

Tue, 24 March 2026 10:43 PMDeepak Mishra भाषा, नई दिल्ली
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क्या है ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़ा संशोधन विधेयक, आखिर किस बात पर भड़का है विपक्ष

सरकार द्वारा मंगलवार को लोकसभा में पेश किए गए ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े एक विधेयक का विरोध करते हुए विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि यह प्रस्तावित कानून हितधारकों के साथ परामर्श के बिना सदन में पेश किया गया है। उन्होंने इसे वापस लेने और संसद की समिति को विचारार्थ भेजने की मांग की। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की ज्योतिमणि ने सवाल किया कि बिना ट्रांसजेंडर लोगों या अन्य हितधारकों से परामर्श कर इसे सदन में कैसे लाया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ट्रांसजेंडर लोगों का पक्ष सुनना नहीं चाहती। उन्होंने विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का अनुरोध किया। उन्होंने कहाकि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का हनन करता है।

सरकार पर लगाया आरोप
कांग्रेस सांसद ने कहाकि इस विधेयक के जरिए यह प्रावधान किया जा रहा है कि ट्रांसजेंडर की लैंगिक पहचान एक मेडिकल बोर्ड तय करेगा और उन्हें कौन किस पहचान से जानता है यह मायने नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समुदाय की पहचान सुनिश्चित करने में नौकरशाही की बाधा खड़ी कर उनके जीवन को और मुश्किल बना रही है। ज्योति मणि ने कहा कि यह केवल कानून से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि गरिमापूर्ण जीवन के बारे में है, लेकिन सरकार समुदाय के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए कह रही है। उन्होंने कहाकि यह संरक्षण नहीं, बल्कि अधिकारों का अतिक्रमण है। उन्होंने कहाकि ट्रांसजेंडर समुदाय के हजारों लोगों ने मौजूदा कानून के तहत पहचान पत्र पाया है, लेकिन यह विधेयक उनके द्वारा हासिल की गई पहचान को छीनने का काम करेगा।

‘संकुचित हो रही ट्रांसजेंडर की परिभाषा’
सपा के आनंद भदौरिया ने चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि यह संशोधन विधेयक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की परिभाषा को बहुत संकुचित कर देता है। उन्होंने कहाकि ट्रांसजेंडर एक ‘व्यापक’ शब्द है लेकिन विधेयक में इस विविधता को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14,15,19 और 21 को कमजोर करने वाला बताया। भदौरिया ने कहाकि यह विधेयक एक मेडिकल बोर्ड बनाने का प्रावधान करता है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी पहचान पत्र देने पर विचार करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के प्रावधान व्यक्तिगत पहचान में काफी दखल देते हैं। उन्होंने विधेयक को संसद की प्रवर समिति के पास भेजने की मांग करते हुए कहा कि 2019 के संबंधित अधिनियम के तहत समुदाय के जिन लोगों ने कानूनी पहचान हासिल की थी। इस विधेयक के कानून का रूप लेने से उनके जीवन में अनिश्चितता आ जाएगी।

द्रमुक का भी विरोध
द्रमुक की टी सुमति ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहाकि यह मानवाधिकारों और समुदाय के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का हनन करता है। उन्होंने विधेयक में मेडिकल बोर्ड का गठन किए जाने के प्रावधान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या कोई व्यक्ति अपनी पहचान मेडिकल बोर्ड के जरिए तय कराएगा? द्रमुक सांसद ने यह उल्लेख किया कि 17वीं लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि, ‘हमने समुदाय के 16-17 हजार लोगों को पहचान दी है।’ उन्होंने कहाकि फिर दो साल बाद सरकार उनकी पहचान क्यों वापस ले रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि 30 हजार पहचान पत्र पहले ही जारी किए जा चुके हैं, क्या उनकी फिर से जांच होगी? उन्होंने कहाकि पहचान मानवाधिकार है, कोई सरकारी परमिट नहीं। उन्होंने कहाकि सरकार कहती है कि पहचान व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं हो सकती। विधेयक का सबसे खतरनाक पहलू, यह नैतिक पुलिसिंग ही है।

स्थायी समिति के पास भेजने की मांग
सुमति ने विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग करते हुए कहा कि इसे लाने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय या किसी भी हितधारक से परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि एक व्यापक समस्या पैदा करने वाली पद्धति उभर रही है। यह सरकार व्यक्तिगत जीवन के हर क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हम क्या खाते हैं, हमें क्या पसंद है, हम क्या देखें, हम क्या लिखें? द्रमुक सांसद ने आरोप लगाया कि नागरिकों के धर्म और जाति के आधार पर ध्रुवीकरण करने के बाद, अब लैंगिक पहचान के आधार पर उन्हें बांटा जा रहा है।

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तृणमूल कांग्रेस की जून मालिया ने भी विधेयक को ट्रांसजेंडर समुदायों के अधिकारों पर अतिक्रमण करने वाला बताते हुए कहाकि उनकी लैंगिक पहचान मेडिकल पड़ताल से नहीं की जा सकती। उन्होंने विधेयक को खतरनाक लैंगिक अंतराल पैदा करने वाला बताते हुए दावा किया कि सरकार इसके जरिए कानून में संशोधन नहीं कर रही, बल्कि इसके दायरे से लोगों को हटा रही है। मालिया ने विधेयक को वापस लिए जाने और संसद की प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग की।

सरकार ने क्या कहा
इससे पहले, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए सदन में रखते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल उन लोगों की सुरक्षा करना है जो अपनी जैविक स्थिति के कारण गंभीर सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं। उन्होंने कहाकि नीति का उपयोग केवल उन लोगों के लिए किया जाएगा, जिन्हें वास्तव में ऐसी सुरक्षा की आवश्यकता है। मंत्री ने कहाकि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से उभयलिंगी (ट्रांसजेंडर) कहे जाने वाले एक विशिष्ट वर्ग के लोगों की रक्षा करने की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि नये कानून का लाभ प्रदान करने के लिए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की उचित और निश्चित पहचान व सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समुदाय को एक सटीक परिभाषा देने की जरूरत थी।