Last Call Before US attack on Iran How Netanyahu Convinced Donald Trump for war बदले का मौका, इतिहास में होंगे अमर; नेतन्याहू ने ईरान पर हमले के लिए ट्रंप को कैसे मनाया, International Hindi News - Hindustan
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बदले का मौका, इतिहास में होंगे अमर; नेतन्याहू ने ईरान पर हमले के लिए ट्रंप को कैसे मनाया

EXPLAINER: ईरान हमले के लिए ट्रंप को क्या नेतन्याहू ने मनाया था? ऐसी खबरें खूब चर्चा में हैं। जानकारी के मुताबिक ईरान पर अमेरिका के हमले के 48 घंटे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप से बात की थी।

Tue, 24 March 2026 05:29 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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बदले का मौका, इतिहास में होंगे अमर; नेतन्याहू ने ईरान पर हमले के लिए ट्रंप को कैसे मनाया

EXPLAINER: ईरान हमले के लिए ट्रंप को क्या नेतन्याहू ने मनाया था? ऐसी खबरें खूब चर्चा में हैं। जानकारी के मुताबिक ईरान पर अमेरिका के हमले के 48 घंटे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप से बात की थी। दावा किया जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने ट्रंप को इस बात के लिए कन्विंस किया कि ईरान पर हमले का यही सही वक्त है। इसके लिए नेतन्याहू ने कई तर्क दिए। पहले तो उन्होंने ट्रंप से कहाकि उनके पास अपने ऊपर जानलेवा हमले का बदला लेने का सुनहरा मौका है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रंप को यह लालच भी दिया कि वह ईरान में सत्ता परिवर्तन करके इतिहास में अपना नाम सुर्खियों में दर्ज करा सकते हैं। आइए जानते हैं ईरान पर हमले से पहले क्या कुछ हुआ था...

नेतन्याहू ने कहा-इससे अच्छा मौका नहीं
बेंजामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप के सामने तर्क रखा कि अयातुल्लाह खामेनेई को खत्म करने का इससे मौका फिर नहीं मिलेगा। इसके साथ ही ट्रंप खुद पर जानलेवा हमले की साजिश का ईरान से बदला भी ले सकते हैं। बता दें कि 2024 में जब ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे तो उनके ऊपर हमले हुए थे। अमेरिकी न्याय विभाग ने एक पाकिस्तानी व्यक्ति पर अमेरिका में लोगों को भर्ती करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। यह योजना, जनवरी 2020 में वॉशिंगटन द्वारा इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर के शीर्ष कमांडर, कासेम सोलेमानी की हत्या के प्रतिशोध के रूप में योजना बनाई गई थी।

तय हो चुकी थी वॉर
हालांकि नेतन्याहू से बातचीत से पहले ही ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन को मंजूरी दे दी थी। सूत्रों के मुताबिक बस यह तय नहीं हुआ था कि हमले का समय क्या होगा और अमेरिका किन शर्तों पर हमला करेगा। इससे पहले अमेरिकी सेना हफ्तों तक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही थी। यहां तक कि एक तारीख भी तय हो चुकी थी, लेकिन खराब मौसम के चलते वह भी टल गई। सूत्रों ने गोपनीयता का शर्त पर बताया कि हालांकि यह पक्का नहीं कहा जा सकता कि हमले का आदेश देने के लिए ट्रंप नेतन्याहू से कितना प्रभावित थे। लेकिन इतना तो तय है कि इजरायली पीएम के प्रस्ताव ने उन पर असर डाला। इसके बाद ही उन्होंने 27 फरवरी को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को मंजूरी दी थी।

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नेतन्याहू ने क्या दिया था तर्क
नेटन्याहू ने तर्क दिया कि अगर ट्रंप ईरानी नेतृत्व को खत्म करके यहां सत्ता परिवर्तन करते हैं तो वह इतिहास रच सकते हैं। इतना ही नहीं, नेतन्याहू ने इस बात की संभावना पर भी जोर दिया कि हो सकता है, हो सकता है ईरानी शासन से उकताए लोगों का सपोर्ट भी ट्रंप को मिल जाए। उन्होंने कहाकि ईरानी, खामेनेई के खिलाफ उठ खड़े होंगे और सत्ता को उखाड़ फेंकें। हालांकि वाइट हाउस या नेतन्याहू के ऑफिस ने दोनों के बीच इस तरह की बातचीत पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

‘मिशन खामेनेई’ की पल-पल की थी जानकारी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और उनके वरिष्ठ साथियों पर हमले की पल-पल की जानकारी थी। दोनों राष्ट्रप्रमुखों को यह इंटेलीजेंस ब्रीफिंग दी जा रही थी कि यह सभी तेहरान में एक कंपाउंड में छिपे हुए हैं। गौरतलब है कि इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर और उनके साथियों का खात्मा हो गया था।

ट्रंप ने क्या कहा
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया के मुद्दे पर करीबी सहयोगियों के साथ चर्चा के दौरान ईरान पर हमला करने का सुझाव सबसे पहले रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दिया था। ट्रंप ने यह बात सोमवार को टेनेसी में आयोजित ‘मेम्फिस सेफ टास्क फोर्स’ गोलमेज बैठक में कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि निर्णय लेने से पहले उन्होंने हेगसेथ और 'ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' के चेयरमैन, वायु सेना के जनरल डैन केन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को फोन कर ईरान की स्थिति पर चर्चा की।

उन्होंने कहाकि मैंने पीट को फोन किया, मैंने जनरल केन को फोन किया। मैंने अपने कई लोगों को फोन किया और कहाकि चलिए बात करते हैं। पश्चिम एशिया में हमारे सामने एक अहम मुद्दा है। ईरान नाम का देश 47 वर्षों से आतंकवाद का प्रसार करता रहा है और वह परमाणु हथियार के बेहद करीब है। या तो हम यूं ही आगे बढ़ते रह सकते हैं या फिर पश्चिम एशिया की ओर कदम बढ़ाकर एक बड़ी समस्या का समाधान कर सकते हैं।

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