मीनाक्षी नटराजन कौन हैं? राहुल गांधी की OG टीम मेंबर से लेकर राज्यसभा चुनाव में बवाल तक
फरवरी 2025 में मीनाक्षी नटराजन को एआईसीसी तेलंगाना प्रभारी बनाया गया, जिससे वे फिर सुर्खियों में आईं। उनकी राजनीतिक यात्रा राहुल गांधी के विश्वास और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में कांग्रेस की रणनीति को दर्शाती है।

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवार थीं, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने शिकायत की थी कि नटराजन ने तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। केवट के वकील संकेत गुप्ता के अनुसार, नटराजन के एफिडेविट में इस मामले का जिक्र नहीं था, जिसके आधार पर नामांकन खारिज कर दिया गया। यह घटना मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव को नाटकीय बना रही है, जहां भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार को उतारकर सस्पेंस बढ़ा दिया है।
मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की पुरानी टीम की सदस्य हैं और कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। नटराजन 2008 में राहुल गांधी की ओर से एआईसीसी सेक्रेटरी के रूप में केंद्रीय पार्टी सर्कल में शामिल की गईं। 2009 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की ओर से चुनी गईं युवा नेताओं में शामिल थीं। उन्होंने मंदसौर सीट से जीत हासिल की, जो कांग्रेस छह बार भाजपा से हार चुकी थी। हालांकि 2014 और 2019 में वे उसी सीट पर भाजपा के सुधीर गुप्ता से हार गईं।
राहुल गांधी ने जताया भरोसा
फरवरी 2025 में मीनाक्षी नटराजन को एआईसीसी तेलंगाना प्रभारी बनाया गया, जिससे वे फिर सुर्खियों में आईं। उनकी राजनीतिक यात्रा राहुल गांधी के विश्वास और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में कांग्रेस की रणनीति को दर्शाती है। नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर लोकतंत्र और संविधान को कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के तीसरे उम्मीदवार उतारने के बाद से यह सब शुरू हुआ।
मीनाक्षी नटराजन ने इसे सीट चोरी बताया और आरोप लगाया कि उनके वकीलों की दलीलें नहीं सुनी गईं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग ने उन्हें 40 मिनट इंतजार करवाया और फिजिकल सुनवाई नहीं होने दी। कांग्रेस ने आयोग को ज्ञापन सौंपा है और कानूनी विकल्प खुला रखा है।
केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह लोकतंत्र की हत्या का स्पष्ट मामला है। उन्होंने कहा, 'अगर इस देश में लोकतंत्र का थोड़ा सा भी अंश बचा है तो निर्वाचन आयोग को बिना किसी देरी के इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अगर वे हमें बुधवार सुबह मिलने का समय देते हैं, तो हम तब तक इंतजार करने के लिए तैयार हैं। नहीं तो, हम सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लेंगे।' कांग्रेस का आरोप है कि उनके उम्मीदवार का नामांकन सिर्फ एक नोटिस का हवाला देकर खारिज किया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है।




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