मॉनसून आ गया या सिर्फ धोखा? मौसम विभाग के दावों के बीच वैज्ञानिकों ने क्यों दी बड़ी चेतावनी!
मौसम वैज्ञानिक अक्षय देवरस ने चौंकाने वाला विश्लेषण साझा किया है। उन्होंने कहा, ‘वायुमंडल के निचले स्तर पर जो हवाएं सोलापुर और उसके आसपास आ रही हैं, वे वास्तव में हिंद महासागर से नहीं, बल्कि उत्तरी अफ्रीका से आ रही हैं।’

भारत में मॉनसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत ने आम लोगों से लेकर नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिकों तक को उलझन में डाल दिया है। एक तरफ जहां भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मॉनसून के तेजी से आगे बढ़ने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और मौसम वैज्ञानिक इस पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। अगर आप भी झुलसती गर्मी के बीच झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं या खेती-किसानी से जुड़े हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि इस समय देश में मानसून की असल स्थिति क्या है।
देश में 12% कम बारिश: पहले हफ्ते का चिंताजनक आंकड़ा है। मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 8 जून के बीच देश में मानसून की शुरुआत काफी कमजोर रही है।
लंबी अवधि का औसत: भारत में इस शुरुआती अवधि में आमतौर पर जितनी बारिश होनी चाहिए, इस बार उससे 11.9% कम बारिश दर्ज की गई है।
आठ दिनों का रिकॉर्ड: मानसून सीजन के शुरुआती 8 दिनों में से 7 दिन देश को सामान्य से कम बारिश का सामना करना पड़ा है। देश में अब तक केवल 24.7 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है।
मौसम विभाग बनाम महाराष्ट्र सरकार: क्यों आमने-सामने आए दोनों?
इस समय सबसे बड़ा विवाद महाराष्ट्र में मानसून के आगमन को लेकर खड़ा हो गया है।
मौसम विभाग का दावा: मौसम विभाग ने घोषणा की कि 4 जून को केरल पहुंचने के बाद मानसून ने बहुत तेजी से दूरी तय की और 8 जून को महाराष्ट्र के सोलापुर तक पहुंच गया।
सरकार की चेतावनी: दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 7 जून को ही किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी कर दी। उन्होंने किसानों से साफ कहा कि 'शुरुआती बारिश को देखकर जल्दबाजी में बुआई न करें, क्योंकि मानसून के आगे बढ़ने की रफ्तार सुस्त पड़ने की पूरी आशंका है।'
वैज्ञानिकों का खुलासा: अफ्रीका से आ रही सूखी हवा ने रोका रास्ता
मौसम विभाग ने जिस मॉनसून के आने का दावा किया है, उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सहमत नहीं हैं। मौसम वैज्ञानिक अक्षय देवरस ने एक चौंकाने वाला विश्लेषण साझा किया है। उन्होंने कहा, 'वायुमंडल के निचले स्तर पर जो हवाएं सोलापुर और उसके आसपास आ रही हैं, वे वास्तव में हिंद महासागर से नहीं, बल्कि उत्तरी अफ्रीका से आ रही हैं। यह सूखी हवा है। केवल मानसून-पूर्व की गरज-चमक वाली बारिश को देखकर मानसून के आने की घोषणा करना गुमराह करने वाला हो सकता है। इससे किसानों की फसल बर्बाद हो सकती है, क्योंकि अगले 10 दिनों तक महाराष्ट्र में तापमान काफी ऊंचा रहने वाला है।' वैज्ञानिकों के अनुसार, हवा में कम नमी के कारण 20 जून तक दक्षिण-पश्चिमी प्रायद्वीप से आगे मानसूनी बादलों का बनना पूरी तरह रुक गया है।
आपके राज्य का क्या है हाल? कहीं सूखा, कहीं बंपर बारिश
भले ही राष्ट्रीय स्तर पर बारिश में 12% की कमी है, लेकिन जिन राज्यों में मानसून की एंट्री हो चुकी है, वहां की स्थिति काफी अलग-अलग है। 1 जून से 8 जून के बीच राज्यों में बारिश की स्थिति इस प्रकार है।
मॉनसून भले ही कागजों पर आगे बढ़ रहा हो, लेकिन मौसम के इस अजीब पैटर्न को देखते हुए देश के मध्य और उत्तर-पश्चिम हिस्सों में रहने वाले लोगों और किसानों को फिलहाल 20 जून तक फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है। बुआई और खेती से जुड़े फैसले मौसम के पूरी तरह स्थिर होने के बाद ही लें।




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