विजय ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रखे जाने वाली सफेद तौलिया हटवाई, आखिर क्यों किया ऐसा
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी नई तस्वीर में विजय उसी कुर्सी पर बैठे दिखाई दिए, लेकिन इस बार कुर्सी पर सफेद तौलिया नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे जनता की आवाज सुनने वाली राजनीति का उदाहरण बताया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनके दफ्तर में की गई एक छोटी सी पहल है। मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी कुर्सी पर रखा जाने वाला सफेद तौलिया हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर इसे वीआईपी कल्चर के खिलाफ एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विजय से अपील की थी कि सरकारी दफ्तरों में कुर्सियों पर सफेद तौलिया लगाने की परंपरा खत्म की जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि यह व्यवस्था अब सिर्फ स्वच्छता का साधन नहीं रह गई, बल्कि सत्ता और विशेषाधिकार का प्रतीक बन चुकी है। लिसिप्रिया ने अपने पोस्ट में लिखा था कि भारत में वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के लिए इस तरह की परंपराओं पर रोक लगनी चाहिए।
क्यों चर्चा में आ गई विजय की यह तस्वीर
कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी नई तस्वीर में विजय उसी कुर्सी पर बैठे दिखाई दिए, लेकिन इस बार कुर्सी पर सफेद तौलिया नहीं था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे जनता की आवाज सुनने वाली राजनीति का उदाहरण बताया। कई यूजर्स ने कहा कि विजय सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं पर करीब से नजर रखते हैं और लोगों की भावनाओं को समझते हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे केवल प्रतीकात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि असली बदलाव प्रशासन और नीतियों में दिखना चाहिए।
भारत के कई सरकारी दफ्तरों में वर्षों से कुर्सियों पर सफेद तौलिया लगाने की परंपरा चली आ रही है। शुरुआत में इसका उद्देश्य गर्म मौसम में कुर्सियों को साफ रखना और पसीने से बचाना था, लेकिन समय के साथ यह सरकारी रुतबे और अफसरशाही संस्कृति का हिस्सा बन गया। विजय की ओर से इसे हटाने के कदम को उनके समर्थक जनसरोकार वाली राजनीति से जोड़ रहे हैं। वहीं, लिसिप्रिया कंगुजम ने भी विजय का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह साबित करता है कि आम लोगों की आवाज सुनी जा रही है और बदलाव संभव है।




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