AIMIM chief Asaduddin Owaisi displeasure Madhya Pradesh High Court decision Bhojshala case 'पूजा स्थल अधिनियम मजाक बनकर रह गया', भोजशाला मामले पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी, India News in Hindi - Hindustan
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'पूजा स्थल अधिनियम मजाक बनकर रह गया', भोजशाला मामले पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी

हैदराबाद से लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे दुरुस्त करेगा और इस आदेश को पलट देगा। बाबरी मस्जिद के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।'

Fri, 15 May 2026 09:52 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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'पूजा स्थल अधिनियम मजाक बनकर रह गया', भोजशाला मामले पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी

भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने नाराजगी जताई है। शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के तहत नहीं है। बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में दिए गए फैसले में एक धर्म को प्राथमिकता दी गई, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकारों को कमजोर किया गया। इसके अलावा, इस फैसले ने एक नया रास्ता खोल दिया है। अब कल कोई भी किसी भी पूजा स्थल की पवित्रता को चुनौती देने के लिए सामने आ सकता है।'

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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह और भी चिंताजनक है क्योंकि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के महत्व को संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर से जोड़ते हुए स्वीकार किया था, लेकिन आज अदालत उसी सिद्धांत को पूरी तरह नजरअंदाज करती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम का मजाक बनाकर रख दिया गया है।'

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अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने हिंदू समुदाय की दो जनहित याचिकाएं मंजूर कर लीं और इस मध्यकालीन स्मारक की धार्मिक प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर के तौर पर तय की। इसके साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

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उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के जज विजय कुमार शुक्ला और जज आलोक अवस्थी ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर फैसला सुनाया। खंडपीठ ने कहा, 'भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद के विवादित परिसर का धार्मिक चरित्र वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में तय किया जाता है।' अदालत ने विवादित स्मारक में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य दस्तावेजों के हवाले से कहा कि स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन आवंटन की अर्जी देती है, तो राज्य सरकार इस पर कानूनी प्रावधानों के मुताबिक विचार कर सकती है।