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ईरान जंग के बीच ट्रंप ने भारत भेजा अपना खास दूत, कई बड़े अधिकारी कर चुके हैं दौरा; क्या मायने?

पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिकी युद्ध नीति के अवर सचिव एलब्रिज कोल्बी ऐतिहासिक भारत दौरे पर हैं। जानिए भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी, सप्लाई चेन की चुनौतियों और कूटनीति पर पीएम मोदी के कड़े संदेश की पूरी खबर।

Tue, 24 March 2026 09:21 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान जंग के बीच ट्रंप ने भारत भेजा अपना खास दूत, कई बड़े अधिकारी कर चुके हैं दौरा; क्या मायने?

अमेरिकी युद्ध नीति के अवर सचिव एलब्रिज कोल्बी शीर्ष भारतीय अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बातचीत के लिए भारत दौरे पर हैं। हालांकि यह एक पूर्व-निर्धारित यात्रा है, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संकट के मद्देनजर इसका महत्व काफी बढ़ गया है। अमेरिकी युद्ध विभाग द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, एलब्रिज कोल्बी की इस यात्रा का मुख्य फोकस महत्वपूर्ण भारत-अमेरिका संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

यह दौरा मुख्य रूप से फरवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त बयान में तय किए गए लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इसके अलावा, अमेरिका-भारत 'प्रमुख रक्षा भागीदारी' की रूपरेखा को जमीनी स्तर पर लागू करने पर भी चर्चा होगी।

अमेरिकी राजदूत का स्वागत और दौरे की अहमियत

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पहले ही कोल्बी के दौरे की घोषणा कर दी थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी उत्सुकता जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा- भारत में युद्ध के अवर सचिव एलब्रिज कोल्बी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं!

यह कोल्बी की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो इसे एक ऐतिहासिक क्षण बनाती है। कोल्बी को ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिकी रक्षा नीति तैयार करने वाले प्रमुख चेहरों में से एक माना जाता है। उनकी यह यात्रा इंडो-पैसिफिक कमांडर एडमिरल सैमुअल पपारो और अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हिटिंग जैसे अन्य वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की हालिया भारत यात्राओं के ठीक बाद हो रही है।

पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चैन पर असर

कोल्बी के भारत पहुंचने का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के समय हो रहा है। इस क्षेत्रीय युद्ध का सीधा असर भारत और अन्य एशियाई देशों पर पड़ा है। कच्चे तेल, गैस और उर्वरक (फर्टिलाइजर) जैसे प्रमुख उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई लाइन) इस युद्ध के कारण बुरी तरह बाधित हुई है।

द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की कवायद

यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हो रही है जब नई दिल्ली और वाशिंगटन हालिया तनावों के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने और उन्हें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले दोनों देशों के बीच कई कारणों से कुछ तनातनी देखी गई थी। जैसे-

  • व्यापारिक विवाद
  • मई में हुआ भारत-पाकिस्तान संघर्ष
  • भारत द्वारा लगातार रूसी ऊर्जा की खरीद

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पीएम मोदी का स्पष्ट रुख और शांति की अपील

इसी बीच, सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक भूमिका को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों से तनाव कम करने और इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने का आग्रह कर रहा है। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीत की जानकारी देते हुए कड़े शब्दों में कहा: कूटनीति में भारत की भूमिका स्पष्ट है। शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। मैंने व्यक्तिगत रूप से पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बात की है। मैंने सभी से तनाव कम करने और इस युद्ध को खत्म करने का आग्रह किया है। भारत ने नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की है। वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की नाकेबंदी किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।