अगर होर्मुज से जहाज सुरक्षित निकालना है तो…, ईरान ने दुनिया के सामने रखी शर्त
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उसे मित्र देशों के जरिए अमेरिका की बातचीत के प्रस्ताव के बारे में संदेश मिले हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसी कोई बातचीत हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने का एकमात्र रास्ता ईरानी अधिकारियों से पहले से की गई बातचीत है। हाल ही में ईरान की सुरक्षा परिषद ने यह ऐलान किया है। साथ ही परिषद ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के तटों या द्वीपों को निशाना बनाने की कोशिश की गई, तो बड़े जलमार्गों पर नौसैनिक बारूदी सुरंगे बिछा दी जाएंगी। युद्ध के बीच स्ट्रेट के दोनों ओर बड़ी संख्या में तेल के जहाज फंसे हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अुसार, सोमवार को परिषद ने होर्मुज को लेकर बड़ी घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि अब गैर शत्रुतापूर्ण जहाज या नॉन हॉस्टाइल वैसल्स का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना पूरी तरह से ईरानी अधिकारियों के साथ पहले से तालमेल पर निर्भर होगा। परिषद ने चेताया है कि अगर मुल्क के पावर प्लांट्स पर हमले किए जाते हैं, तो तत्काल और निर्णायक जवाब ईरानी बलों की तरफ से दिया जाएगा।
नेवल माइन्स बिछाने की धमकी
परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी तटों या द्वीपों को निशाना बनाने की कोई भी कोशिश की गई, तो सभी प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्तों पर 'विभिन्न प्रकार की नौसैनिक बारूदी सुरंगें' बिछा दी जाएंगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे कदम उठाना उनका कानूनी अधिकार है और सैन्य स्तर पर स्वीकार्य भी है। परिषद ने चेताया कि कोई भी रक्षात्मक उपाय फारस की खाड़ी में समुद्री गतिविधियों पर रोक लगा देंगे, जिसके चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसी स्थिति तैयार हो जाएगी।
बयान में कहा गया है कि अगर समुद्री गतिविधियों में रुकावट आती है, तो इसकी जिम्मेदारी वॉशिंगटन और इजरायली शासन की होगी। परिषद ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर जहाज सुरक्षित रूप से क्षेत्र से गुजरना चाहते हैं, तो 'ईरान के साथ समन्वय' ही एकमात्र रास्ता है।
ईरान को मित्र देशों से अमेरिका की बातचीत के प्रस्ताव के संदेश मिले
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि उसे मित्र देशों के जरिए अमेरिका की बातचीत के प्रस्ताव के बारे में संदेश मिले हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ऐसी कोई बातचीत हुई है।
सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा, पिछले कुछ दिनों में कुछ मित्र देशों के जरिए संदेश मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के मकसद से बातचीत का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, उन्होंने पिछले 24 दिनों से चल रहे इस थोपे गए युद्ध के दौरान अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत या चर्चा से इनकार किया।
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