CM विजय थलापति के ज्योतिष प्रेम पर DMK का तंज, कहा- उन्हें पार्टी से ज्यादा पंडित पर भरोसा
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय थलापति ने OSD के पद से ज्योतिषी राधान पंडित को हटा दिया है। लेकिन उनके ऊपर लगातार तंज हो रहे हैं। डीएमके की तरफ से कहा गया है कि मुख्यमंत्री को ज्योतिषी नहीं बल्कि किसी कानूनी आदमी की जरूरत है।

CM Vijay Thalapathy: तमिलनाडु में ऐतिहासिक जीत दर्ज करके सत्ता के शिखर पर बैठने वाले विजय थलापति ने पहला यू-टर्न ले लिया है। मंगलवार को अपने निजी ज्योतिषी रिकी राधान पंडित वेट्रीवेल को मुख्यमंत्री का ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) नियुक्त करके विवादों में आए विजय ने एक ही दिन में इस आदेश को रद्द कर दिया। लेकिन एक दिन के अंदर ही विजय के पक्ष और विपक्ष की तमाम पार्टियों ने उनके इस फैसले पर सवाल उठा दिए। इतना ही नहीं विजय थलापति के ऊपर काफी तंज भी कसे गए। इसी क्रम में डीएमके की तरफ से कहा गया कि मुख्यमंत्री को ज्योतिषी की नहीं बल्कि एक कानून के जानकार की जरूरत है, जो उन्हें कामकाज समझा सके। डीएमके के प्रवक्ता ने कहा कि एक ज्योतिषी भविष्यवाणी बताने के अलावा और क्या करेगा।
मीडिया से बात करते हुए डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलानगावन ने कहा कि मुख्यमंत्री को ज्योतिषी की जगह किसी कानूनी आदमी को नियुक्त करना चाहिए था। उन्होंने कहा,"ऐसा लगता है कि अब से संसद और विधानसभा की कोई भूमिका नहीं होगी। केवल ज्योतिषी ही शुभ समय बताएंगे। वह कोई अधिकारी नहीं है। वर्तमान में उन्हें (सीएम विजय) को ऐसे लोगों की जरूरत ह जो सरकारी नियमों और शक्तियों के बारे में सही सलाह दे सकें। एक ज्योतिषी भविष्य बताने के अलावा और क्या कर सकता है। लेकिन उन्हें अपनी पार्टी से ज्यादा भरोसा उस (ज्योतिषी) पर है।"
गौरतलब है कि लगातार होते विरोध के बाद विजय ने ज्योतिषी राधान पंडित को नियुक्त करने के फैसले को रद्द कर दिया गया है। हालांकि, इस पर अभी तक उनकी पार्टी की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। लेकिन उनके गठबंधन सहयोगियों ने इस पर जमकर विरोध जताया था।
सनातन हमारी संस्कृति नहीं: डीएमके प्रवक्ता
तमिलनाडु विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उदयानिधि स्टालिन द्वारा सनातन के विनाश को लेकर एक बार फिर से बयान दिया गया था। इस पर डीएमके प्रवक्ता ने कहा कि द्रमुक (डीएमके) जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ है। दक्षिण भारत में एक समतावादी समाज है। इसलिए तमिलनाडु में सनातन की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, "सनातन का मतलब अविनाशी होता है। उनके (उत्तर भारतीयों) के विचारों के मुताबिक मनु धर्म अविनाशी है। यह दक्षिण की संस्कृति नहीं है। यहां एक समतावादी समाज है। उत्तर भारत में ऐसा नहीं है। लोगों को जन्म के आधार पर चार वर्गों में विभाजित किया गया था। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। यह प्रथा तमिलनाडु में आई है। यह हमारी संस्कृति नहीं है। उन्होंने यही कहा था। DMK इसी कारण सनातन धर्म के खिलाफ है। उदयानिधि स्टालिन ने भी यही कहा था।" गौरतलब है कि उदयानिधि स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा के पटल पर खड़े होकर कहा था कि सनातन का खत्म करना होगा।
तमिलनाडु विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल करके सत्ता में आए विजय लगातार राजनैतिक ड्रामा का स्वाद चख रहे हैं। 4 मई से लेकर अब तक उनकी पार्टियों ने एक के बाद एक कही चुनौतियों का सामना किया है। हालांकि, अब तक उनकी पार्टी पूरी तरह से विजेता साबित हुई है। बहुमत पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही टीवीके को आज फ्लोर टेस्ट के दौरान 144 विधायकों का साथ मिला, जबकि विजय के पास केवल 120 विधायकों का समर्थन था। एआईएडीएमके के 24 विधायक एक गुट बनाकर विजय को समर्थन दे रहे हैं।




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