तमिलनाडु में विजय के लिए डबल खुशी, बहुमत हासिल करने के साथ-साथ SC से भी बड़ी राहत
फैसले को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए, जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच ने डीएमके के केआर पेरियाकरुप्पन को दो हफ्ते के अंदर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के लिए बुधवार दोहरी खुशी लेकर आया। एक ओर जहां 144 विधायकों के साथ विजय की टीवीके ने विधानसभा में बहुमत हासिल किया, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें TVK विधायक आर. श्रीनिवासा सेथुपति को तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोका गया था। यह रोक पोस्टल बैलेट की गिनती में हुई गड़बड़ी के मामले में लगाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव संबंधी विवाद में हाई कोर्ट के इस दखल को बहुत गलत और कानूनी रूप से अस्थिर करार दिया।
हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश डीएमके के उम्मीदवार की याचिका पर आया था, जो तिरुपत्तूर सीट पर टीवीके के सेथुपति से सिर्फ एक वोट से हार गए थे। डीएमके ने आरोप लगाया था कि एक वोट (एक पोस्टल बैलेट) की गिनती गलती से किसी दूसरी सीट पर कर ली गई थी हाई कोर्ट द्वारा डीएमके उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई करने के फैसले को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए, जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच ने डीएमके के केआर पेरियाकरुप्पन को दो हफ्ते के अंदर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
इस मामले में याचिकाकर्ता टीवीके के सेथुपति को भी दो हफ्ते के अंदर अपना रिजॉइंडर (जवाब के जवाब में) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने आदेश में कहा, ''इस बीच, विवादित आदेश का प्रभाव और उसका अमल रुका रहेगा, और हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर आगे की कार्यवाही भी रुकी रहेगी।'' सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि मद्रास हाई कोर्ट ने डीएमके उम्मीदवार द्वारा दायर याचिका को अपने रिट अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 226) के तहत स्वीकार कर लिया, जबकि उसने यह भी माना था कि इस तरह का उपाय केवल चुनाव याचिका के तहत ही उपलब्ध है। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, "यह बेहद गलत है।''
टीवीके विधायक सेथुपति ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर एकतरफा अंतरिम राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अपनी याचिका में, टीवीके पार्टी ने मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष डीएमके उम्मीदवार की याचिका की स्वीकार्यता को चुनौती दी थी। टीवीके के सेथुपति ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में यह तर्क दिया है कि संविधान का अनुच्छेद 329(b) चुनाव से जुड़े मामलों में हाई कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से रोक लगाता है। सेथुपति के अनुसार, चुनाव से जुड़े विवादों को केवल 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (RPA) की धारा 80 के तहत एक चुनाव याचिका के जरिए से ही उठाया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि संवैधानिक पीठ के फैसलों ने लगातार यह माना है कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद और नतीजे घोषित होने तक, अदालतें रिट कार्यवाही के जरिए चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकतीं।




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