कर्नाटक में सोनिया गांधी जैसी हैसियत और ओहदा चाहते हैं सिद्धारमैया? आलाकमान ने सुनते खारिज किया प्लान
सिद्धारमैया ने एक ऐसा 'पावर प्ले' किया है जिसने कांग्रेस हाईकमान को भी सोच में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया ने पार्टी नेतृत्व के सामने सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक ‘कोऑर्डिनेशन कमेटी’ बनाने का प्रस्ताव रखा है।

कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार (29 मई) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। समझा जाता है कि सिद्धारमैया की इन नेताओं के साथ अलग-अलग हुई मुलाकात में कर्नाटक में नई सरकार के गठन, राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों के लिए होने वाले चुनावों पर विचार विमर्श किया गया। इससे यह बात साबित होती है कि कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद भी सिद्धारमैया का दबदबा कम होता नहीं दिख रहा है।
दरअसल, 77 वर्षीय सिद्धारमैया न केवल कर्नाटक कांग्रेस के बड़े कद्दावर नेता हैं बल्कि सामाजिक न्याय के बड़े नेता के रूप में भी उभरे हैं। वह राज्य में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बाद तीसरी बड़ी सियासी शख्सियत हैं। ऐसे में उन्हें नजरअंदाज कर पार्टी नहीं चल सकती है। पार्टी ने उन्हें पहले राज्यसभा की सदस्यता ऑफर की लेकिन उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया और अपनी मंशा जता दी कि वह कर्नाटक में ही रहना चाहते हैं। इस बीच, उन्होंने पार्टी आलाकमान के सामने एक अहम प्रस्ताव सौंपा है, जिसके तहत उन्होंने राज्य में एक कॉर्डिनेशन कमेटी बनाने का सुझाव दिया है।
डीके शिवकुमार को 'चेकमेट' करने की तैयारी?
दरअसल, अपने प्रतिद्वंद्वी डीके शिवकुमार की ताजपोशी की तैयारी के बीच, सिद्धारमैया ने एक ऐसा 'पावर प्ले' किया है जिसने कांग्रेस हाईकमान को भी सोच में डाल दिया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया ने पार्टी नेतृत्व के सामने सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बिठाने के लिए एक 'कोऑर्डिनेशन कमेटी' (समन्वय समिति) बनाने का प्रस्ताव रखा है। गौरतलब है कि उन्होंने 2018 में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के दौरान भी इसी तरह की समिति के अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभाई थी। वह चाहते हैं कि यह कमेटी सरकार और संगठन के बीच तालमेल बनाने के लिए काम करे।
सोनिया गांधी जैसी हैसियत की चाह
जानकारों का मानना है कि इस समिति के जरिए सिद्धारमैया राज्य की राजनीति में एक 'वैकल्पिक शक्ति केंद्र' के रूप में बने रहना चाहते हैं, जिससे सरकार के फैसलों पर उनका नियंत्रण बना रहे। कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि जैसे यूपीए शासनकाल में सोनिया गांधी यूपीए अध्यक्ष के रूप में काम कर रही थीं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) की भी अध्यक्ष थीं, इसलिए सरकार के हर छोटे-बड़े फैसलों पर उनकी रजामंदी जरूरी थी, ठीक उसी तरह सिद्धारमैया राज्य की अगली सरकार के हर छोटे-बड़े फैसले पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं।
दिल्ली में मुलाकातों का दौर और मांगों की फेहरिस्त
शुक्रवार को दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के दौरान सिद्धारमैया ने अपनी शर्तें उनके सामने साफ कर दी हैं लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पार्टी आलाकमान ने उनके इस कॉडिनेशन कमेटी वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। चर्चा इस बात की भी है कि उन्होंने अपने बेटे यतींद्र और अपने खास वफादारों के लिए नए मंत्रिमंडल में जगह मांगी है, जिसमें उपमुख्यमंत्री का पद भी शामिल है।




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