वह बेवफा नहीं है, सायोनी घोष मेरी बच्ची जैसी... बगावत से छलका महुआ मोइत्रा का दर्द
TMC में मची बगावत के बीच सायोनी घोष के बागी होने पर सांसद महुआ मोइत्रा का दर्द छलका है। इंटरव्यू में महुआ ने कहा कि सायोनी उनकी बच्ची जैसी है, वह बेवफा या लालची नहीं बल्कि डरी हुई है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची भारी राजनीतिक उथल-पुथल और सांसदों-विधायकों की बगावत के बीच, पार्टी की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा का दर्द छलक पड़ा है। मोइत्रा ने बागी गुट और पार्टी के भविष्य पर खुलकर बात की है। इस दौरान जादवपुर से युवा सांसद सायोनी घोष के बागी गुट में शामिल होने के सवाल पर महुआ बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने सायोनी के चरित्र का बचाव करते हुए उन्हें 'डर पर काबू' पाने की सलाह दी है।
'वह मेरी बेटी और बहन जैसी है'
'द इंडियन एक्सप्रेस' को दिए इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने पार्टी में टूट और वफादारी के सवाल पर सायोनी घोष का जिक्र करते हुए कहा कि उनके जाने से उन्हें व्यक्तिगत तौर पर गहरी ठेस पहुंची है। महुआ ने कहा, "योग्यता और कड़ी मेहनत मायने रखती है, लेकिन वफादारी बहुत जरूरी है। कुछ चीजों ने मुझे वास्तव में बहुत आहत किया है। सायोनी (घोष) मेरी बच्ची जैसी है, मेरी बहन जैसी है। अगर कोई और पार्टी छोड़ता, तो मुझे कोई दर्द नहीं होता। मैं उसे देखती हूं तो लगता है कि वह मेरी बेटी की उम्र की है और मैंने सच में उसे उस तरह से प्यार किया है।"
'वह बेवफा या पैसों की लालची नहीं है'
राजनीति में अक्सर पाला बदलने वाले नेताओं पर पैसों के लेन-देन या लालच के आरोप लगते हैं, लेकिन महुआ ने सायोनी को इन सब से अलग बताया। उन्होंने कहा: "मैं इस बात की गारंटी ले सकती हूं कि वह कोई बेवफा या फायदा उठाने वाली इंसान नहीं है। उसे पैसों में कोई दिलचस्पी नहीं है। वह काफी सादा जीवन जीती है और हमेशा काम करती रहती है।"
महुआ ने सायोनी की काबिलियत की तारीफ करते हुए कहा कि वह जीरो से उठकर यहां तक पहुंची हैं। उनके पास सही मूल्य हैं, वह लोगों से जुड़ती हैं और एक बेहद दयालु इंसान हैं। महुआ ने 33 वर्षीय सायोनी को भविष्य के एक मजबूत विपक्षी नेता के रूप में देखा था।
बगावत की वजह 'डर' और सायोनी को सलाह
सायोनी ने आखिर बगावत का रास्ता क्यों चुना, इस पर महुआ मोइत्रा का मानना है कि इसके पीछे 'डर' एक बड़ी वजह हो सकता है। मोइत्रा ने कहा, "शायद यह डर और अन्य चीजों का मिला-जुला परिणाम है। उनके एक पिता हैं... मुझे नहीं पता कि असल बात क्या है। लेकिन ऐसे लोगों को मेरी सलाह यही है कि- 'मैं जानती हूं कि आप डरे हुए हैं, लेकिन जब तक हम डर पर जीत हासिल नहीं करते, हम कुछ नहीं जीत सकते।' सबकी अपनी किस्मत होती है, लेकिन मेरी उसे यही सलाह होगी कि डर पर काबू पाओ, आगे अभी बहुत जिंदगी पड़ी है।"
'पार्टी ने 5 साल में क्या कुछ नहीं दिया'
महुआ मोइत्रा ने इस बात पर भी निराशा जताई कि जिस पार्टी ने सायोनी को इतने कम समय में इतना राजनीतिक कद दिया, उसे छोड़ना बहुत परेशान करने वाला है। उन्होंने याद दिलाया कि सायोनी 2021 में ही पार्टी में आई थीं। इन 5 सालों में पार्टी ने उन्हें विधायक का टिकट दिया, राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष बनाया और 2024 के लोकसभा चुनाव में 'जादवपुर' जैसी सबसे प्रतिष्ठित सीट (जो कभी खुद ममता बनर्जी की सीट हुआ करती थी) से टिकट दिया।
भरोसे का टूट गया
महुआ ने इंटरव्यू में साफ कहा कि राजनीति में सब कुछ ठीक है, लेकिन अपनों का यूं मुकर जाना सबसे ज्यादा चुभता है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "जब सायोनी जैसा व्यक्ति ऐसे अचानक पलट जाता है, तो फिर आप किस पर भरोसा करेंगे? जब ऐसे लोग जहाज से कूदने (पार्टी छोड़ने) की सोचते हैं, तो यह बहुत ही ज्यादा परेशान करने वाला होता है।"
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस संकट का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर बगावत की स्थिति भी पैदा हो गई है, जिससे उसकी संगठनात्मक और विधायी ताकत काफी कमजोर हुई है। पिछले सप्ताह पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक (80 में से 58) आधिकारिक विधायक दल से अलग हो गए। इसके बाद पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता मिल गई।
विद्रोही गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और भी बढ़ गई है। बाद में यह संकट संसद तक भी पहुंच गया। लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी सांसदों ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के 20 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। बुधवार को यादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी बागी सांसदों के गुट में शामिल हो गईं।




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