दीदी को धोखा नहीं देंगे बिहारी! शत्रुघ्न के बाद कीर्ति भी मुसीबत में ममता के साथ; बागियों को ललकारा
TMC Crisis Latest: ममता बनर्जी के लिए अच्छी खबर है। TMC में मची भारी कलह के बीच सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में आ गए हैं। जानिए बागियों पर कीर्ति आजाद का बड़ा पलटवार और ताजा राजनीतिक घटनाक्रम।

TMC Crisis Latest: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक बगावत देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां पार्टी के कई पुराने विधायक और सांसद बगावती तेवर अपनाते हुए अलग गुट बना चुके हैं, वहीं इस भारी संकट के बीच टीएमसी के दो दिग्गज 'बिहारी' चेहरों- शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद ने साफ कर दिया है कि वे ममता बनर्जी के साथ डटकर खड़े हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा ने तोड़ी चुप्पी: मुसीबत में दीदी ने दिया था साथ
आसनसोल से टीएमसी सांसद और 'बिहारी बाबू' के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने पाला बदलने या बागी गुट में शामिल होने की सभी अटकलों पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। पार्टी में जारी कलह के बीच उनकी शुरुआती खामोशी से कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब उनका रुख बिल्कुल स्पष्ट है।
एक दिन पहले मीडिया से बातचीत में शत्रुघ्न सिन्हा ने स्पष्ट किया कि दुःख और संकट की इस घड़ी में वह पूरी तरह से ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं और किसी भी कीमत पर पार्टी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि जब बीजेपी में उनका टिकट कट गया था, तब ममता बनर्जी ने ही उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें राजनीतिक आश्रय दिया था। सिन्हा के मुताबिक, उनका फर्ज है कि वह इस मुश्किल वक्त में 'दीदी' के साथ रहें। सिन्हा ने यह भी साफ किया कि बागी सांसदों के पत्र पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं और उनका किसी भी बागी गुट से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा, ''मैं अपने लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर रहा हूं- मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ था, मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ हूं तथा मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ ही रहूंगा। मेरा कहीं और जाने का कोई इरादा नहीं है।'' तीन लाइन का व्हिप आमतौर पर राजनीतिक दलों द्वारा संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतदान से पहले जारी किया जाता है। सिन्हा का यह बयान ऑनलाइन प्रसारित हो रही तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की कथित सूची में उनका नाम आने के बाद आया है। केंद्रीय मंत्री रह चुके सिन्हा पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ थे और वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से पहले सिन्हा कांग्रेस में भी थे। उन्होंने कहा, ''मैं ममता बनर्जी का साथ उनके कठिन समय में नहीं छोड़ूंगा.... जब मैं 2019 में (लोकसभा) चुनाव (पटना से) हार गया था, तो बहुत कम लोग मेरे साथ खड़े थे और ममता बनर्जी उन लोगों में से एक थीं, जो मेरे साथ खड़े थे।''
सिन्हा ने 2019 का चुनाव बिहार के पटना साहिब निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, जबकि उनकी पत्नी पूनम सिन्हा ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ से समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। उन्होंने कहा कि हालांकि सभी राजनीतिक दलों में उनके दोस्त हैं, लेकिन वह बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, ''पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में कई तरह की अटकलें हैं। कुछ लोग सच बोल रहे हैं, जबकि कुछ अफवाहें फैला रहे हैं। कुछ लोगों ने दावा किया है कि मैं तथाकथित बागी समूह में शामिल हो गया हूं।''
सिन्हा ने कहा कि वह ''स्वभाव से विद्रोही हैं''। उन्होंने कहा कि वह ''हमेशा सच बोलते हैं'' और अपनी बात को बेबाकी के साथ रखते हैं। उन्होंने कहा, ''इसलिए मैं अपनी बात स्पष्ट कर रहा हूं.... ममता जी मेरे कठिन समय में मेरे साथ थीं, इसलिए मैं उनके कठिन समय में उनका साथ नहीं छोड़ सकता।'' सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्होंने हाल में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अब भी पश्चिम बंगाल में मत हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है।
कीर्ति आजाद का पलटवार: बागियों को बताया 'गद्दार'
इससे पहले बर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आजाद भी ममता बनर्जी के समर्थन में मजबूती से सामने आए हैं। उन्होंने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व पर अपना भरोसा जताया है, बल्कि बागी नेताओं पर जमकर निशाना भी साधा है। बिहारी चेहरे कीर्ति आजाद ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) का डर दिखाकर और लालच देकर टीएमसी के नेताओं को तोड़ रही है। उन्होंने पीठ में छुरा घोंपने वालों को 'गद्दार' और 'चूहे' तक कह डाला।
आजाद ने ममता बनर्जी के संघर्ष को याद करते हुए उनकी तुलना एक 'घायल शेरनी' से की और दावा किया कि वह इस संकट से फिर मजबूती से उभरेंगी। बागी गुट द्वारा 20 सांसदों के समर्थन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए आजाद ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में हुई बागी सांसदों की बैठक में केवल 13 सांसद ही शामिल हुए थे।
पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच चल रही तनातनी पर आजाद ने कहा कि कल्याण बनर्जी एक भावुक नेता हैं और उन्होंने हमेशा दीदी का साथ दिया है। आजाद को पूरा भरोसा है कि ममता बनर्जी जल्द ही इस आंतरिक विवाद को सुलझा लेंगी।
टीएमसी में कलह की कहानी
टीएमसी इस समय अपने इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीतियों को लेकर जो असंतोष पनपा था, उसने अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले लिया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में लगभग 64 विधायकों ने अपना अलग गुट बना लिया है।
दिल्ली में काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र सौंपा है। इस बागी गुट में सायोनी घोष और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे बड़े और चर्चित चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं। लोकसभा सांसदों और विधायकों के अलावा प्रकाश चिक बराइक सहित कुछ राज्यसभा सांसदों के भी इस्तीफे की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे नाजुक वक्त में, जब ममता बनर्जी के अपने कई पुराने और राज्य के वफादार नेता उनका साथ छोड़ रहे हैं, तब बिहार से आकर टीएमसी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद का यह स्पष्ट समर्थन ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी राजनीतिक और नैतिक संजीवनी है। इन दोनों नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में भले ही भूचाल आया हो, लेकिन वे 'दीदी' को धोखा नहीं देंगे।




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