RSS से उठी पाकिस्तान से बातचीत की आवाज, महबूबा मुफ्ती बोलीं- कोई और रास्ता नहीं
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबले के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखना चाहिए।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जनरल सेक्रेटरी दत्तात्रेय होसबले के उस बयान का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखना चाहिए। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए संवाद के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हम उनके बयान का स्वागत करते हैं। यह पीडीपी के रुख को पुष्ट करता है, खासकर हमारे संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के रुख को कि अगर कश्मीर में स्थायी शांति चाहिए तो पाकिस्तान के साथ बातचीत का द्वार हमेशा खुला रहना चाहिए। बातचीत जारी रखनी होगी क्योंकि इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान 'दोस्त बदले जा सकते हैं, पड़ोसी नहीं' का हवाला देते हुए महबूबा ने कहा कि अगर आरएसएस महासचिव ने स्पष्ट रूप से कहा होता कि भारत को पाकिस्तान से बात करनी चाहिए तो यह और बेहतर होता। उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने के प्रयासों का उदाहरण दिया। महबूबा ने कहा कि एक तरफ छोटा सा ईरान है, दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियां। इतने हमलों के बावजूद वे बातचीत से समाधान निकालना चाहते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद एहसास
इस दौरान पीडीपी प्रमुख ने याद दिलाया कि 2016 में ऑपरेशन सिंदूर (सर्जिकल स्ट्राइक्स) के एक साल बाद दोनों देशों को एहसास हुआ कि बातचीत जरूरी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में चली संवाद प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद में कमी आई, गिरफ्तारियां घटीं और अत्याचार कम हुए। महबूबा ने कहा कि उन्हें सूचना है कि पिछले दो-तीन महीनों से भारत और पाकिस्तान के सेवानिवृत्त जनरलों व नौकरशाहों के बीच तीसरे देश में ट्रैक-2 डिप्लोमेसी शुरू हो गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और घाटी के माहौल पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
शराब लाइसेंस और एनएचपीसी विवाद
वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेस द्वारा लगाए गए आरोप पर कि पीडीपी सरकार में सबसे ज्यादा शराब लाइसेंस जारी किए गए, महबूबा मुफ्ती ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ‘अगर पीडीपी को नेकां की तरह भारी बहुमत मिलता तो हम शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देते। लेकिन हम दोनों बार गठबंधन सरकार चलाए, हमारे पास इतना बहुमत नहीं था। इस दौरान महबूबा ने पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर 1996 में उन्होंने सात बिजली परियोजनाएं एनएचपीसी को नहीं सौंपी होतीं तो सरकार को शराब राजस्व पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा दो और परियोजनाएं एनएचपीसी को सौंपे जाने की आलोचना की। महबूबा ने कहा कि अगर ये बिजली परियोजनाएं हमारे पास होतीं तो शराब की दुकानों की जरूरत ही नहीं पड़ती। इससे बेरोजगारी की समस्या हल हो जाती और 200 यूनिट मुफ्त बिजली भी दी जा सकती थी।




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