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जाति जनगणना पर सियासत के बीच RSS का भेदभाव मिटाने का शंखनाद, होसबले की अपील

बिहार में जाति जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद देश में बढ़ी सियासी सरगर्मी के बीच आरएसएस ने जातीय भेदभाव खत्म करने का शंखनाद कर दिया है। होसबले की स्वयं सेवकों से इस बारे में अपील की है।

Thu, 12 Oct 2023 11:12 PMKrishna Bihari Singh पीटीआई, वडोदरा
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जाति जनगणना पर सियासत के बीच RSS का भेदभाव मिटाने का शंखनाद, होसबले की अपील

एक तरफ बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े सामने आने के बाद सियासत गर्म है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयं सेवक ने जातिगत भेदभाव खत्म करने का आह्वान किया है। आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले (Dattatreya Hosabale) ने गुरुवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार है। उन्होंने आरएसएस कार्यकर्ताओं से जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए काम करने की अपील की और देशवासियों में एकता की भावना पैदा करने की जरूरत पर जोर दिया।

दत्तात्रेय होसबले ने स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब भारतीय एथलीटों ने एशियाई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया तो किसी ने उनकी जाति या धर्म के बारे में नहीं पूछा। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान लोगों ने बिना जाति या धर्म पूछे प्रवासी मजदूरों की मदद की। इसी तरह लोगों ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के पीछे वैज्ञानिकों की जाति और धर्म के बारे में नहीं पूछा। इससे पता चलता है कि हमारा देश चाहे संकट में हो या सफलता में, एकजुट रहता है। 

होसबले ने कहा-केवल संकट या सफलता के दौरान नहीं, हम सभी में एकता और सहयोग की भावना हर समय होनी चाहिए। भारत दुनिया को (अतीत में) केवल इसलिए कुछ दे सका क्योंकि हम अपनी एकता बरकरार रखने में सक्षम थे। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं। ये लोग हिंदुओं के बारे में बात करने पर आरएसएस पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगा रहे हैं। सनातन धर्म अनुष्ठानों और पूजा के तरीकों के बारे में नहीं है, यह इंसान में भगवान को देखने, अच्छे आचरण और समाज के कल्याण के बारे में है।

होसबले ने कहा- जिस तरह भारत और उसके लोगों ने यहूदी, पारसी, दलाई लामा और उनके अनुयायियों को आश्रय दिया। वह 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत को प्रदर्शित करता है। कोरोना के समय में हमने दुनिया के लिए टीके बनाए। हमने श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट के दौरान मदद की। यह प्रदर्शित करता है कि भारत के पास वसुधैव कुटुंबकम के बारे में बात करने का नैतिक अधिकार है। हिंदू समाज और देशवासियों के पास भारत को 'विश्वगुरु' बनाने की शक्ति है। एक दिन, भारत फिर दुनिया को रास्ता दिखाएगा।

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