पाकिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए, RSS बोला; सरकार को दी ये सलाह
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, '26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, 'देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी उकसावे वाली हरकतें करता रहता है।'

RSS यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है और संवाद के लिए हमेशा रास्ता खुला रहना चाहिए। आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) होसबाले ने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब समय आ गया है कि नागरिक समाज नेतृत्व करे।
सरकारों को सलाह
'पीटीआई-वीडियो' के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा, 'किसी भी देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करना आवश्यक है और मौजूदा सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही हमें अपने दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा उनसे संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए।' आरएसएस के सरकार्यवाह ने दोनों देशों के बीच गतिरोध को तोड़ने में लोगों के बीच आपसी संपर्क को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि 'इसे अब और अधिक से अधिक आजमाया जाना चाहिए'।
हालांकि सरकार पारंपरिक राजनयिक चैनलों से इतर 'ट्रैक टू' कूटनीति पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन विपक्षी नेताओं सहित कई बुद्धिजीवियों ने लंबे समय से नागरिक समाज की भागीदारी की वकालत की है।
नागरिक समाज से उम्मीद
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यही एक उम्मीद है, क्योंकि मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंततः नागरिक समाज के रिश्ते ही काम आएंगे। क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम कभी एक राष्ट्र रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'इसलिए, इस पर जोर देना होगा।'
आतंकवाद पर क्या बोले
उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान और उसके आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने के रवैये से कैसे निपटना चाहिए। उन्होंने 26/11, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए कहा, 'देखिए, (कूटनीतिक रूप से) हर संभव प्रयास किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान लगातार छोटी-छोटी उकसावे वाली हरकतें करता रहता है।' उन्होंने कहा कि व्यापार और वाणिज्य, वीजा जारी करना बंद नहीं होना चाहिए क्योंकि 'संवाद के लिए हमेशा एक खिड़की (खुली) रहनी चाहिए'।
होसबाले ने कहा कि इसी वजह से कूटनीतिक संबंधों को बनाए रखा गया है। उन्होंने कहा कि वहां के शिक्षाविदों, खिलाड़ियों, वैज्ञानिकों और सामुदायिक नेताओं को आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व में भारत के प्रति कुछ दूरी और नकारात्मकता विकसित हो गई है।




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