7 MPs का छोड़ना AAP के लिए कितना बड़ा झटका, पंजाब चुनाव पर क्या असर? BJP के लिए कैसे विन-विन सिचुएशन
Raghav Chadha AAP Crisis: आप छोड़ने वालों में सबसे बड़ा नाम राघव चड्ढा, पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक और राज्यसभा में नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल हैं। राघव चड्ढा को पद से हटाकर अशोक मित्तल को नया डिप्टी लीडर बनाया गया था।

Raghav Chadha AAP Crisis: पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को करारा झटका लगा है। उसके 10 में से सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है और भाजपा का दामन थाम लिया है। इससे राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम से पंजाब में आप को बड़ा झटका लगा है क्योंकि वहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आप छोड़ने वालों में आप का एक ऐसा बड़ा नेता शामिल है, जिसे पंजाब में आप की जीत और भगवंत मान सरकार का सूत्रधार कहा जाता रहा है। ऐसे में यह फैसला आम आदमी पार्टी और पंजाब की सरकार के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
आप छोड़ने वालों में सबसे बड़ा नाम राघव चड्ढा, पार्टी के संगठन महासचिव संदीप पाठक और राज्यसभा में नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल हैं। राघव चड्ढा को पद से हटाकर अशोक मित्तल को नया डिप्टी लीडर बनाने के साथ ही उनका पार्टी से विवाद शुरू हुआ था लेकिन जिसे उनकी जगह बनाया, वह मित्तल भी राघव के साथ हो लिए। बड़ी बात यह है कि कुछ दिनों पहले अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी की रेड भी पड़ी थी।
AAP का संगठनात्मक ढांचा हो सकता है कमजोर
दरअसल, राघव चड्ढा को ही पंजाब में आप की जीत का वास्तविक रणनीतिकार और भगवंत मान सरकार का सूत्रधार कहा जाता है लेकिन उनके आप छोड़ने से पार्टी के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि उनके जाने से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में भारी कमजोरी आ सकती है।
भाजपा की स्थिति मजबूत
आप छोड़ने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल के अलावा पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह और विक्रमजीत सिंह साहनी भी हैं। ये सभी पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। यानी पंजाब से आप के सात सांसदों में से पांच ने भाजपा का दामन थाम लिया है। दिल्ली से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी आप छोड़ने वालों में शामिल हैं। इनके अलावा एक और नाम राजेंद्र गुप्ता का है। इन नेताओं के शामिल होने से भाजपा को पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो अब तक राज्य में कमजोर स्थिति में थी।
पंजाब AAP में नेतृत्व का संकट और अलग नैरेटिव
यह दावा किया जा रहा है कि आप के दो-तिहाई राज्यसभा सांसद भाजपा में जा रहे हैं, जो पार्टी के 'ईमानदार राजनीति' के नैरेटिव को कमजोर कर सकता है और पंजाब में नेतृत्व को भी कमजोर कर सकता है। दूसरी तरफ, विपक्ष का मनोबल बढ़ सकता है। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को आम आदमी पार्टी को और मान सरकार को घेरने का मौका मिल सकता है और उस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा सकते हैं। विपक्ष इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने को विश्वासघात के रूप में पेश किया जा सकता है और राज्य में एक अलग सियासी माहौल बनाने की कोशिश हो सकती है।
भाजपा के लिए विन-विन सिचुएशन
भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन कह चुके हैं कि पंजाब में भाजपा अब 2027 में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में अब इन नेताओं के भाजपा में आने से पार्टी को 'नया चेहरा' और 'मजबूत नेतृत्व' मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पंजाब में आम आदमी पार्टी के दबदबे को सीधी चुनौती दे सकता है और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा को एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर सकता है। साथ ही राज्यसभा में उसकी ताकत पहले से और ज्यादा मजबूत होने वाली है। दोनों ही स्थितियों में बाजपा के लिए यह विन-विन सिचुएशन है।




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