ईरान युद्ध में मध्यस्थता करवा सकता है भारत; इस देश के राजदूत ने की तारीफ, वजह भी बताई
ईरान युद्ध को लेकर पोलेंड के राजदूत एंटोनी ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान तीनों ही देश भारत को महत्वपूर्ण संवादकर्ता मानते हैं। इस वजह से भारत मध्यस्थता कर सकता है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से पूरे वैश्विक समुदाय के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में हो रहे इस युद्ध की वजह से दुनिया की 20 फीसदी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है। इसकी वजह से ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। सभी देश इस युद्ध के खत्म होने की राह देख रहे हैं। इसी बीच पोलैंड के राजदूत डॉक्टर पियोट्र एंटोनी स्विताल्स्की ने इस युद्ध को समाप्त करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया। अपनी बात को मजबूत करने के लिए उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए रायसीना डॉयलॉग्स का भी जिक्र किया, जहां पर तीनों देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
न्यूज 18 से बात करते हुए एंटोनी ने कहा कि ईरान युद्ध को रोकने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। नई दिल्ली में आयोजित हुए रायसीना डॉयलॉग्स का जिक्र करते हुए एंटोनी ने कहा, "मुझे लगता है, रायसीना डॉयलॉग्स का मंच प्रतीक था। नई दिल्ली में हुए सम्मेलन के दौरान एक ही मंच पर अमेरिका, इजरायल और ईरान के प्रतिनिधि मौजूद थे। यह तीनों ही देश भारत को महत्वपूर्ण मानते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में भी भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"
रायसीना डॉयलॉग्स में एक साथ थे तीनों देश: एंटोनी
दुनिया के देशों के बीच बढ़ते विभाजन पर बात करते हुए एंटोनी ने कहा, "दुनिया के देशों के बीच का विभाजन गहरा है। उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, विकसित-विकासशील... ऐसे कई उदाहरण हैं, यह विभाजन काफी गहरा है, लेकिन भारत ऐसी स्थिति में है कि वह इन विभाजनों को दूर कर सकता है।" उन्होंने इस समय पर जारी तमाम युद्धों के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन युद्धों को दौरान संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की सीमाएं भी सामने आई हैं, जो मौजूदा संघर्षों का प्रभावी समाधान नहीं कर पा रही हैं।
ईरान युद्ध में सैन्य रूप से नहीं आएगा पोलैंड: एंटोनी
पोलैंड के राजदूत ने साफतौर पर सरकार का स्टैंड बताते हुए कहा कि अमेरिका की अपील के बाद भी पोलैंड इस युद्ध में नहीं आएगा। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह अपने सहयोगियों और साझेदारों का समर्थन करते रहेंगे। और इस बात पर चर्चा के लिए तैयार हैं कि हम कैसे योगदान दे सकते हैं। हम तनाव कम करने और मध्यस्थता की उम्मीद करते हैं।
आपको बता दें, एंटोनी ऐसे पहले नहीं है, जो इस युद्ध में भारत की भूमिका की बात कर रहे हैं। इजरायल और ईरान दोनों के ही साथ भारत के महत्वपूर्ण संबंध हैं। अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजशिकयान के साथ बातचीत करके ईरान के एनर्जी सेंटरों पर हुए हमलों की निंदा की थी। इसके अलावा एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि भारतीयों जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित निकालने के लिए ईरानी नौसेना ने सहायता दी थी। इसके अलावा वर्तमान में ईरान का एक जहाज कोच्चि में भी लंगर डाले हुए है। ऐसे में यह संभावना बन सकती है कि भारत इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाए।




साइन इन