No one expects Jasprit Bumrah to run chase why did CJI Suryakant say this कोई भी सूर्यकुमार यादव से आखिरी ओवर डालने की उम्मीद नहीं करता, ऐसा क्यों बोले CJI सूर्यकांत, India News in Hindi - Hindustan
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कोई भी सूर्यकुमार यादव से आखिरी ओवर डालने की उम्मीद नहीं करता, ऐसा क्यों बोले CJI सूर्यकांत

28 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर स्थित GNLU यानी गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह में सीजेआई पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि एक सफल टीम तब बनती है, जब सभी की भूमिकाएं स्पष्ट हों और हर एक व्यक्ति को उनकी ताकत के बारे में पता हो।

Mon, 2 March 2026 02:03 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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कोई भी सूर्यकुमार यादव से आखिरी ओवर डालने की उम्मीद नहीं करता, ऐसा क्यों बोले CJI सूर्यकांत

देश की सर्वोच्च अदालत में फैसले देने वाले भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने क्रिकेट का उदाहरण दिया है। इस दौरान उन्होंने भारतीय क्रिकेट टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव का नाम लिया। साथ ही कानून के छात्रों को बताया कि किसी एक क्षेत्र में माहिर होना कितना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे क्रिकेट खिलाड़ी सभी भूमिकाएं नहीं निभा सकते। वैसे ही वकील भी इस पेशे के हर क्षेत्र में माहिर नहीं बन सकते।

28 फरवरी को गुजरात के गांधीनगर स्थित GNLU यानी गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 16वें दीक्षांत समारोह में सीजेआई पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि एक सफल टीम तब बनती है, जब सभी की भूमिकाएं स्पष्ट हों और हर एक व्यक्ति को उनकी ताकत के बारे में पता हो।

उन्होंने कहा कि कोई भी उम्मीद नहीं करता कि डेथ ओवर्स में सूर्य कुमार यादव गेंदबाजी करें। उन्होंने कहा कि कोई उम्मीद नहीं करता कि बल्लेबाजी करते हुए रन चेज करने के दौरान जसप्रीत बुमराह सबसे आगे रहें। ऐसे ही वकीलों को भी धीरे-धीरे उन क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए, जो उनकी क्षमता है। उन्होंने कहा कि वकीलों को उन ताकतों के इर्द गिर्द ही अपने पहचान बनानी चाहिए।

छात्रों को सलाह

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कानून का पेशा उन लोगों को शायद ही कभी इनाम देता है, जो सभी कामों को बराबर करने की कोशिश करते हैं।

बार एंड बेंच के अनुसार, सीजेआई ने कहा, 'मेरे प्रिय ग्रेजुएट्स, इस पेशे में आप कहां फिट बैठते हैं, यह सवाल खुद से शुरुआत में ही पूछना जरूरी है। यहां उन लोगों को शायद ही कभी सफलता मिलती है जो हर काम को बराबर तरीके से करने की कोशिश करते हैं। आप में से कुछ लोग क्रिकेट के शौकीन होंगे, और अगर आप सुनवाइयों के बीच T20 वर्ल्ड कप देख रहे हैं, तो आपने एक बात गौर की होगी। कामयाब टीमें इस आधार पर नहीं बनतीं कि हर खिलाड़ी को हर चीज में माहिर होना चाहिए। कोई भी सूर्यकुमार यादव से आखिरी ओवरों में बॉलिंग करने की उम्मीद नहीं करता, और न ही कोई यह उम्मीद करता कि जसप्रीत बुमराह रन चेज करें। उन्हें सिर्फ वही करने का भरोसा दिया जाता है जिसमें वे माहिर हैं। आपकी वकालत पर भी यही सिद्धांत लागू होता है।'

उन्होंने कहा कि बड़े वकील सब कुछ बराबर करने की कोशिश में ऊंचे पद तक नहीं पहुंचते। उन्होंने कहा, 'यह ऐसा सवाल नहीं है जो करियर के पहले या तीसरे साल में खुद हल हो जाएगा। लेकिन इस सवाल को खुद से जल्दी पूछना और बार-बार पूछना जरूरी है। क्योंकि जो वकील अपने काम में सबसे ज्यादा सुकून और आत्मविश्वास में दिखते हैं, वे लगभग वही लोग होते हैं जिन्होंने कहीं न कहीं दिखावा करना बंद कर दिया और असल मायने में वकालत शुरू कर दी।'

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उन्होंने छात्रों से कहा कि यह पेशा आपसे हर दिन कोई उपलब्धि नहीं मांगता, बल्कि मुश्किल समय में आपकी विश्वसनीयता मांगता है। अंत में यही बात तय करती है कि आप भविष्य में किस तरह के वकील बनेंगे।

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