NCERT apologises for chapter after Supreme court ire says error was purely unintentional CJI हुए फायर तो बैकफुट पर आया NCERT, ‘भ्रष्ट न्यायपालिका’ वाले चैप्टर पर मांगी माफी, India News in Hindi - Hindustan
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CJI हुए फायर तो बैकफुट पर आया NCERT, ‘भ्रष्ट न्यायपालिका’ वाले चैप्टर पर मांगी माफी

माफी मांगने के साथ साथ NCERT ने अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के बाद पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया है। इससे पहले बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे बेहद परेशान करने वाला कदम बताया था।

Thu, 26 Feb 2026 07:39 AMJagriti Kumari भाषा, नई दिल्ली
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CJI हुए फायर तो बैकफुट पर आया NCERT, ‘भ्रष्ट न्यायपालिका’ वाले चैप्टर पर मांगी माफी

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले चैप्टर को लेकर NCERT बैकफुट पर आ गया। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' से संबंधित एक अध्याय को लेकर SC से मिले फटकार के बाद ‘अनुचित सामग्री’ के लिए माफी मांगी है। NCERT ने कहा है कि संबंधित किताबों को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा। इससे पहले बुधवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे बेहद परेशान करने वाला कदम बताया था।

इसके बाद बुधवार को माफी मांगने के साथ साथ NCERT ने अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के बाद पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की जानकारी देते हुए कहा, "यह देखा गया कि संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है।" एनसीईआरटी ने कहा कि वह 'न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है।’

अनजाने में हुई गलती- NCERT

अधिकारी ने इसे अनजाने में हुई एक गलती बताया। अधिकारी ने कहा, ''एनसीईआरटी यह पुनः दोहराता है कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थाओं का सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी पर समझ को मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकारक्षेत्र पर प्रश्न उठाने या उसे कमतर करने का (परिषद का) कोई इरादा नहीं है।''

दोबारा लिखी जाएंगी किताबें

NCERT की तरफ से आगे कहा गया, ''अपनी सतत समीक्षा प्रक्रिया के तहत एनसीईआरटी रचनात्मक सुझावों का स्वागत करता है। इसलिए आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारी से परामर्श के बाद उक्त सामग्री को दोबारा लिखा जाएगा और इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत पर कक्षा आठ के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।''

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सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान

इससे पहले बुधवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में की गई टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया। यह कदम वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष उल्लेख किए जाने के बाद उठाया गया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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सोची-समझी चाल लगती है- CJI

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "संस्थान के प्रमुख के रूप में, मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है। यह एक सोची-समझी चाल लगती है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।" उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित बार और बेंच दोनों इस पर चिंतित हैं।

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जस्टिस जोयमाल्य बागची ने भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह संविधान के बुनियादी ढांचे पर हमला है। उन्होंने कहा, "किताब स्वयं बुनियादी ढांचे के खिलाफ जाती प्रतीत होती है।" अदालत के समक्ष पेश की गई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाठ्यपुस्तक के अध्याय में समाज में न्यायपालिका की भूमिका पर एक पाठ के हिस्से के रूप में 'न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार' पर चर्चा की गई है। इसमें मामलों के लंबित होने और बुनियादी ढांचे के मुद्दों जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख है।

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