Supreme court takes suo motu cognisance of contents of class 7 NCERT chapter on corruption in judiciary किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने दूंगा, NCERT के नए सिलेबस को लेकर भड़के CJI, India News in Hindi - Hindustan
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किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने दूंगा, NCERT के नए सिलेबस को लेकर भड़के CJI

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के तौर पर, उन्होंने अपना फर्ज निभाया है और इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। इससे पहले NCERT ने हाल ही में आठवीं कक्षा के लिए नया सिलेबस जारी किया था।

Wed, 25 Feb 2026 02:14 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने दूंगा, NCERT के नए सिलेबस को लेकर भड़के CJI

NCERT की नई किताबों में अदालतों में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों पर चिंता जताए जाने वाले चैप्टर को शामिल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई है। CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम नहीं करने देंगे। वहीं जस्टिस बागची ने इसे संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ बताया है।

इससे पहले बुधवार को न्यायपालिका पर आधारित पाठ्यपुस्तक के अध्याय पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ से कहा कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाएगा। यह गंभीर चिंता का विषय है।

क्या बोले CJI सूर्यकांत?

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, "मुख्य न्यायधीश के तौर पर मैंने अपना काम किया है और संज्ञान लिया है। यह एक सोचा-समझा कदम लगता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।" मुख्य न्यायधीश ने आगे कहा, "प्लीज कुछ दिन इंतजार करें। बार और बेंच सभी परेशान हैं। सभी हाईकोर्ट के जज परेशान हैं। मैं इस मामले को खुद से देखूंगा। मैं किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।" वहीं जस्टिस बागची ने कहा कि किताब संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ लगती है।

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NCERT की किताब में न्यायपालिका पर क्या?

इससे पहले NCERT ने हाल ही में आठवीं कक्षा के लिए नया सिलेबस जारी किया था जिसमें अदालतों में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर नया अध्याय जोड़ा गया था। एनसीईआरटी की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या और न्यायाधीशों की पर्याप्त कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली 'चुनौतियों' में शामिल हैं। नई किताब के 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' नामक खंड में कहा गया है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं जो ना केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है।

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किताब में 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' शीर्षक वाले संशोधित अध्याय में लिखा है, ''न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। गरीबों और वंचितों के लिए इससे न्याय तक पहुंच का मुद्दा और भी गंभीर हो सकता है। इसलिए न्यायिक प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें प्रौद्योगिकी का उपयोग भी शामिल है और जहां भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आएं, उनके खिलाफ त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।''

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लंबित मुकदमों का भी जिक्र

इसमें भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाओं का जनता के भरोसे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वहीं पुस्तक के मुताबिक उच्चतम न्यायालय में लंबित मुकदमों की अनुमानित संख्या 81,000 है, उच्च न्यायालयों में 62.40 लाख और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं।

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