corruption in judiciary and case pending now in syllabus of 8th class students अदालतों में करप्शन और जजों की कमी; 8वीं क्लास के बच्चों की किताब में पूरा चैप्टर, जस्टिस गवई का जिक्र, India News in Hindi - Hindustan
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अदालतों में करप्शन और जजों की कमी; 8वीं क्लास के बच्चों की किताब में पूरा चैप्टर, जस्टिस गवई का जिक्र

चैप्टर में यह भी बताया गया है कि जजों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट क्या है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई की भी एक टिप्पणी को चैप्टर में जगह दी गई है। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में करप्शन और गलत व्यवहार के मामले चिंता बढ़ाने वाले हैं और इससे आम लोगों के बीच छवि खराब होती है।

Wed, 25 Feb 2026 10:30 AMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अदालतों में करप्शन और जजों की कमी; 8वीं क्लास के बच्चों की किताब में पूरा चैप्टर, जस्टिस गवई का जिक्र

अदालतों में कितने मामले लंबित हैं और कैसे भ्रष्टाचार जैसी समस्या न्यायपालिका में भी पैर पसार रही है। इस संबंध में 8वीं क्लास के बच्चे पढ़ेंगे। NCERT ने नागरिक शास्त्र के सिलेबस में न्यायपालिका को लेकर जो चैप्टर शामिल किया है, उसमें इन चीजों का जिक्र है। छात्र अपनी सिविक्स यानी नागरिक शास्त्र की किताब में पढ़ेंगे कि भ्रष्टाचार कैसे न्यायपालिका पर असर डालता है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर अदालतों में केस लंबित होने और जजों की संख्या कम होने की चुनौती जैसी चीजें भी उनके अध्ययन का हिस्सा होंगी। पहले भी नागरिक शास्त्र में छात्रों को न्यायपालिका के बारे में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसमें काफी संशोधन हुए हैं।

नए पाठ का नाम 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका' रखा गया है। NCERT ने अब नए अकादमिक वर्ष के लिए जो पुस्तक रिलीज की है, उसमें इसे शामिल किया गया है। इससे पहले न्यायपालिका वाले चैप्टर में यही पढ़ाया जाता था कि भारत में अदालतों का ढांचा क्या है। न्याय पाने के क्या तरीके हो सकते हैं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्यों जरूरी है। लेकिन अब नई पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़ी समस्याओं को भी शामिल किया गया है। अदालतों पर भ्रष्टाचार के साये और जजों की संख्या में कमी के चलते मामले लटकने जैसी चीजों को भी इसमें शामिल किया गया है।

देश भर की अदालतों में करीब 5 करोड़ केस पेंडिंग

NCERT की यह नई पुस्तक कहती है कि न्यायपालिका में विभिन्न स्तरों पर लोगों को करप्शन का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि इस स्थिति से गरीब तबके को परेशानी झेलनी पड़ती है और न्याय तक उनकी पहुंच प्रभावित होती है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि राज्यों और केंद्र की ओर से ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि अदालतों में जनता का भरोसा बढ़े और पारदर्शिता आए। इस चैप्टर में बताया गया है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट में 81,000 केस लंबित हैं। इसके अलावा उच्च न्यायालयों में 62.4 लाख मामले लंबित हैं। वहीं जिला और अधीनस्थ अदालतों में 4.7 करोड़ केस सुनवाई के इंतजार हैं।

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जस्टिस बीआर गवई की किस बात का जिक्र

फिर इसके कारणों की बात भी चैप्टर में की गई है। पुस्तक कहती है कि अदालतों में इतने बड़े पैमाने पर केस पेंडिंग होने की एक वजह यह है कि बड़ी संख्या में जजों की कमी है। इसके अलावा न्यायिक ढांचा जटिल है और इन्फ्रास्ट्रक्चर भी कमजोर है। यही नहीं चैप्टर में यह भी बताया गया है कि जजों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट क्या है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई की भी एक टिप्पणी को चैप्टर में जगह दी गई है। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में करप्शन और गलत व्यवहार के मामले चिंता बढ़ाने वाले हैं और इससे आम लोगों के बीच छवि खराब होती है।

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