NCERT में हड़कंप, CJI सूर्यकांत के गुस्से के बाद बिकी 8वीं की किताबें वापस बुलाईं
किताब के चैप्टर 'The Role of the Judiciary in Our Society' में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की गई है। इसमें लंबित मामले और भ्रष्टाचार की बातें शामिल हैं। अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद बुधवार को 'अनुचित सामग्री' के लिए NCERT ने माफी मांगी
कक्षा आठ की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर NCERT यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद में भी हलचल शुरू हो गई है। खबर है कि इस किताब को खरीदने वालों से संपर्क किया जा रहा है और नोटबुक वापस बुलाई जा रही है। हालांकि, इस पुस्तक को अब वापस ले लिया गया है और NCERT ने माफी भी मांगी है। बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अध्याय पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, NCERT काउंटर से सोमवार को किताब खरीदने वालों से मंगलवार और बुधवार को संपर्क किया गया। साथ ही उन्हें कॉपी वापस लौटाने के लिए कहा गया है। अखबार से बातचीत में काउंटर पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि NCERT के एक अधिकारी ने उन्हें किताब खरीदने वालों से संपर्क करने और कॉपी वापस बुलाने के लिए कहा था।
उन्होंने कहा, 'सोमवार को कुल 38 कॉपी बेची गईं थीं। तीन मामलों में कोई कॉन्टेक्ट नंबर नहीं था और UPI ID की मदद से बैंक से डिटेल मांगी जा रहीं हैं।' उन्होंने कहा कि मंत्रालय से किताबें वापस लेने का आदेश है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मंगलवार को NCERT बुक की कोई प्रति नहीं बेची गई है।
चैप्टर पर विवाद
किताब के चैप्टर 'The Role of the Judiciary in Our Society' में न्यायपालिका के सामने मौजूद चुनौतियों पर बात की गई है। इसमें लंबित मामले और भ्रष्टाचार की बातें शामिल हैं। अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद बुधवार को 'अनुचित सामग्री' के लिए NCERT ने माफी मांगी और कहा कि संबंधित पुस्तक को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से फिर से लिखा जाएगा।
स्कूल शिक्षा पाठ्यक्रम के लिए जिम्मेदार एनसीईआरटी ने अपनी वेबसाइट से पुस्तक हटाने के कुछ घंटों बाद ही पाठ्यपुस्तक का वितरण भी रोक दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'यह देखा गया कि संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है।' एनसीईआरटी ने कहा कि वह 'न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है'। उसने इस त्रुटि को पूरी तरह अनजाने में हुई गलती बताया।
CJI सूर्यकांत भड़के
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के बारे में की गई 'आपत्तिजनक' टिप्पणियों का स्वत: संज्ञान लिया। यह कदम वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी की ओर से मामले की तत्काल सुनवाई के लिए विशेष उल्लेख किए जाने के बाद उठाया गया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की पाठ्यपुस्तक में न्यायिक भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने या उसकी निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।





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