नमो भारत राजस्थान और हरियाणा तक बढ़ाएगी रफ्तार, सफर के अलावा भी आपके काम की 5 चीजें
करनाल की कनेक्टिविटी महज एक घंटे की ही रह जाती है तो फिर एनसीआर का विस्तार भी वहां तक हो जाएगा। इससे दिल्ली-एनसीआर में महंगे घरों के संकट से भी थोड़ी राहत मिल सकती है। एयर पलूशन से जूझ रहे लोगों को दिल्ली से थोड़ा दूर ही सही, लेकिन अच्छे माहौल में रहने का मौका मिलेगा।

दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ तक रैपिड रेल की शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी RRTS रेल के विस्तार की चर्चाएं भी जोरों पर हैं। केंद्रीय शहरी एवं आवास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस संबंध में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का सराय काले खां आने वाले समय में रैपिड रेल यानी नमो भारत ट्रेन का हब बनेगा। यहां से एक तरफ करनाल के लिए नमो भारत चलेगी तो वहीं राजस्थान के अलवर और नीमराना तक भी इसकी कनेक्टिविटी होगी। इससे एनसीआर को आने वाले समय में काफी फायदे होने वाले हैं। मेरठ, दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहर सीधे तौर पर इससे लाभान्वित होंगे।
इन शहरों की गति बढ़ेगी तो वहीं दूरी भी घटेगी। माना जा रहा है कि इससे एनसीआर का दायरा भी बढ़ेगा और आपस में शहर पहले के मुकाबले नजदीक होंगे, जिससे नौकरी और कारोबार करने वालों के लिए मोबिलिटी बेहतर हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया, 'सराय काले खां आने वाले समय में देश के सबसे बिजी स्टेशनों में से एक होगा। यहां से एक कॉरिडोर और शुरू होगा, जो दिल्ली से करनाल को जोड़ेगा। इसके अलावा एक रूट सराय काले खां से बावल के बीच होगा। वहीं तीसरा रूट सराय काले खां से नीमराना के बीच होगा। इन रूटों के जरिए दिल्ली एनसीआर का ट्रैफिक कम होगा।'
करनाल का सफर एक घंटे में तय होगा, पलूशन से भी राहत की उम्मीद
पहले बात करते हैं, दिल्ली से करनाल के रूट की। अभी बस या ट्रेन के रास्ते दिल्ली से करनाल जाने या आने में 2 से सवा दो घंटे का वक्त लगता है। अनुमान है कि रैपिड रेल से 125-130 किलोमीटर का यह सफर महज 1 से सवा घंटे में ही तय हो सकेगा। फिलहाल इस रूट पर एनसीआर का विस्तार सोनीपत तक ही माना जाता है। यदि इस रूट से करनाल की कनेक्टिविटी महज एक घंटे की ही रह जाती है तो फिर एनसीआर का विस्तार भी वहां तक हो जाएगा। इससे दिल्ली-एनसीआर में महंगे घरों के संकट से भी थोड़ी राहत मिल सकती है। एयर पलूशन से जूझ रहे लोगों को दिल्ली से थोड़ा दूर ही सही, लेकिन अच्छे माहौल में रहने का मौका मिलेगा।
रेलवे, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे समेत काफी चीजें रैपिड से जुड़ेंगी
नेशनल कैपिटल रीजजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन का कहना है कि नमो भारत के स्टेशनों को ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग माध्यमों से कनेक्ट किया जाएगा। जैसे एयरपोर्ट, इंटर-स्टेट बस टर्मिनल, दिल्ली मेट्रो, एक्सप्रेसवे और भारतीय रेलवे के स्टेशनों से कनेक्ट किया जाएगा। इससे लोग कहीं भी और कभी भी तुरंत पहुंच सकेंगे। जानकारी मिल रही है कि अलवर और करनाल तक के लिए रैपिड रेल के रूट की डीपीआर अगले एक से डेढ़ साल के अंदर ही तैयार हो जाएगी। इस तरह एनसीआर अगले कुछ सालों में ग्रेटर एनसीआर में तब्दील होगा और उससे प्रॉपर्टी बूम, स्पीड, कनेक्टिविटी आदि में इजाफा होगा। इसमें आम आदमी के लिए भी कई फायदे छिपे हैं।
यूपी, हरियाणा और राजस्थान तक रैपिड रेल से क्या फायदे, आपके काम की 5 बातें
1. रैपिड रेल के विस्तार को आवासीय संकट दूर होने के नजरिए से भी देखा जा रहा है। कनेक्टिविटी बढ़ने से लोग मेरठ, पानीपत, अलवर जैसे शहरों से भी दिल्ली-एनसीआर में आकर नौकरी कर सकेंगे। इससे वहां के प्रॉपर्टी मार्केट में भी बूम आएगा।
2. यदि रैपिड रेल से कनेक्टिविटी बढ़ेगी तो सड़कों पर परिवहन का दबाव घटेगा। ऐसी स्थिति में एयर पलूशन से निपटने में भी मदद मिलेगी। दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह मेट्रो लाइफलाइन बना है, उसी तरह ग्रेटर एनसीआर की कनेक्टिविटी के लिए रैपिड रेल वरदान साबित होगी।
3. आप निवेशक हैं और बजट भी बहुत अधिक नहीं है तो फिर आप मेरठ, पानीपत, करनाल, अलवर जैसे शहरों में प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। भविष्य में कनेक्टिविटी के चलते इन शहरों में भी प्रॉपर्टी बूम आने की संभावना है।
4. लंबे समय से सरकार काउंटर-मैग्नेटिक शहर विकसित करने के कंसेप्ट पर काम कर रही है। इसी के तहत मेरठ, मानेसर, सोनीपत जैसे शहरों को विकसित किया जा रहा है। इससे दिल्ली जैसे शहरों में आबादी का दबाव कम होगा और लोगों के जीवनशैली भी बेहतर होगी। उन्हें मूलभूत सुविधाएं भी आसानी से मिल पाएंगी।
5. दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय से इन्फ्रा डिवेलपमेंट के लिए जगह का अभाव है। ऐसे में नए संस्थानों के विकास, औद्योगिकीकरण और ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट्स के लिए जगह मिल सकेगी। कई शहरों में रैपिड रेल को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट्स भी लॉन्च हो रहे हैं। गाजियाबाद के मुरादनगर, मोदीनगर और मेरठ के कई इलाके इसका उदाहरण हैं।




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