इस शहर में सबसे महंगा बिक रहा पेट्रोल, 112 रुपये के पार कीमत; जानिए टॉप 10 शहरों का हाल
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 8 दिन में तीसरी बार बढ़ोतरी। इस शहर में पेट्रोल 112 रुपये पार, जानें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत टॉप 10 शहरों के लेटेस्ट रेट्स।

भारतीय ग्राहकों की जेब पर महंगाई की मार एक बार फिर पड़ी है। पिछले आठ दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 1 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी के मासिक बजट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं (जैसे फल, सब्जियां) की महंगाई पर पड़ेगा।
महज 8 दिन में 5 रुपये तक महंगा हुआ ईंधन
रिपोर्ट्स के अनुसार, एक हफ्ते से थोड़े अधिक समय में ईंधन की कीमतों में कुल 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे की उछाल के साथ 99.51 रुपये पर पहुंच गया है, जबकि डीजल 91 पैसे बढ़कर 92.49 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम में स्थिति सबसे गंभीर
देश के कई शहरों में पेट्रोल ने 110 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत 112.81 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो फिलहाल देश में सबसे अधिक है। इसके अलावा, भारी वाहनों के लिए इस्तेमाल होने वाले डीजल ने भी कुछ शहरों में 100 रुपये का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।
टॉप 10 शहरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट
कीमतों की तुलना के लिए नीचे देश के 10 प्रमुख शहरों के लेटेस्ट रेट्स दिए गए हैं (Goodreturns के आंकड़ों पर आधारित):
| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| हैदराबाद | 112.81 | 100.94 |
| तिरुवनंतपुरम | 112.64 | 101.55 |
| पटना | 111.00 | 97.03 |
| कोलकाता | 110.64 | 97.02 |
| जयपुर | 109.84 | 95.05 |
| मुंबई | 108.45 | 95.02 |
| बेंगलुरु | 108.09 | 95.99 |
| भुवनेश्वर | 106.18 | 97.80 |
| चेन्नई | 105.33 | 97.00 |
| गुवाहाटी | 105.10 | 94.03 |
आखिर क्यों लगातार बढ़ रहे हैं तेल के दाम?
ईंधन की कीमतों में इस ताजा उछाल के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय तनाव और भारतीय तेल कंपनियों (OMC) के घाटे का संयोजन है। इसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है।
ग्लोबल क्रूड ऑयल संकट: पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है।
आयात पर भारी निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का 88% से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसलिए वैश्विक बाजार में किसी भी स्पाइक का सीधा प्रभाव घरेलू कीमतों पर पड़ता है।
कंपनियों का करोड़ों का घाटा: इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 मई को पहली बढ़ोतरी से पहले ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को ईंधन बिक्री पर करीब 1,000 करोड़ रुपये का दैनिक नुकसान हो रहा था।
नुकसान की क्रमिक भरपाई: इन तीन दौर की बढ़ोतरी के बाद, तेल कंपनियों का यह दैनिक घाटा अब घटकर 500 करोड़ रुपये प्रतिदिन से नीचे आ गया है।
"पेट्रोलियम सेक्टर के विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) अपने 8 से 10 रुपये प्रति लीटर के राजस्व घाटे की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर लेतीं, तब तक ग्राहकों के लिए कीमतों में इसी तरह की क्रमिक बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रह सकता है।"
भारतीय पाठकों और अर्थव्यवस्था पर असर
तेल के दामों में इजाफे का प्रभाव सिर्फ निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने से व्यावसायिक माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ता है, जिससे रोजमर्रा के एफएमसीजी उत्पाद और खाद्य सामग्री महंगी हो सकती है। नतीजतन, देश की खुदरा महंगाई दर में भी आने वाले दिनों में उछाल देखने को मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. भारत में फिलहाल सबसे महंगा पेट्रोल किस शहर में मिल रहा है?
उत्तर: ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में सबसे महंगा पेट्रोल हैदराबाद में है, जहां इसकी कीमत 112.81 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। इसके ठीक बाद 112.64 रुपये के साथ तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है।
Q2. पेट्रोल-डीजल की कीमतें कौन तय करता है?
उत्तर: भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर (Exchange Rate) के आधार पर रोजाना ईंधन के दाम तय करती हैं।
Q3. डीजल की कीमत किन शहरों में 100 रुपये के पार चली गई है?
उत्तर: हालिया बढ़ोतरी के बाद तिरुवनंतपुरम (101.55 रुपये प्रति लीटर) और हैदराबाद (100.94 रुपये प्रति लीटर) में डीजल 100 रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।
Q4. पेट्रोल और डीजल के दामों में हालिया तेजी का मूल कारण क्या है?
उत्तर: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना इसका सबसे बड़ा कारण है। चूंकि भारत 88% तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक महंगाई का सीधा असर यहां पड़ता है।




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